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गरीब अफ़राद को मुफ़्त में फ्लैट्स, मैमन बिरादरी का एक अज़ीम कारनामा!

हैदराबाद 18 जनवरी (मो۔जसीम उद्दीन नेज़ामी) महंगाई के इस दौर में जब कि ग़रीबों के लिए किराए के मकान का हुसूल भी जुए शीर लाने के मुतरादिफ़ है,ग़रीबों और ज़रूरत मंदों को मुफ़्त में जदीद सहूलयात के हामिल फ्लैट्स की फ़राहमी किसी अफ़सान

हैदराबाद 18 जनवरी (मो۔जसीम उद्दीन नेज़ामी) महंगाई के इस दौर में जब कि ग़रीबों के लिए किराए के मकान का हुसूल भी जुए शीर लाने के मुतरादिफ़ है,ग़रीबों और ज़रूरत मंदों को मुफ़्त में जदीद सहूलयात के हामिल फ्लैट्स की फ़राहमी किसी अफ़सानवी किरदार का एक हिस्सा मालूम होताहै…मगर हैदराबाद में मुस्लमानों के एक तबक़े ने इस अफ़साने को हक़ीक़त का एक एसा रूप दे दिया है जो पूरे मुस्लिम मुआशरे के लिए क़ाबिल तक़लीद नमूना बन चुका है।

दरअसल आज की ये रिपोर्ट हैदराबाद में मौजूद मैमन बिरादरी के उस फ़लाही सरगर्मीयों के हवाले से है जिस का बुनियादी मक़सद मैमन बिरादरी में मौजूद गरीब अफ़राद को ,ग़ुर्बत और मुफ़लिसी के दलदल से निकाल कर तरक़्क़ी और इस्तिहकाम के वो मवाक़े फ़राहम करना है जिसके सहारे ,बे सहारा अफ़राद लेने वाला हाथ के बजाय देने वाला हाथ बन जाय।क़ाबिल शताइश पहलू ये है कि मैमन बिरादरी अपने इस मक़सद मे का फ़ी हद तक कामयाब भी हैं ।दरअसल हैदराबाद हलाई मैमन जमातके नाम से एक फ़लाही तंज़ीम क़ायम है जिसके तहत मुख़्तलिफ़ फ़लाही सरगर्मियां अंजाम दे जाती हैं

ताहम जो काम इस तंज़ीम को दीगर फ़लाही तंज़ीमों से अलग शनाख़्त फ़राहम करता है वो है गरीब और ज़रूरत मंद अफ़राद को बगै़र किसी किराए के फ्लैट की फ़राहमी, जो दो ता तीन बेड रूम्स ,लीविंग हाल,किचन,कॉमन ओर अटाइच बाथरूम पर मुश्तमिल है। काफ़ी मुनज़्ज़म अंदाज़ में काम करनेवाली इस तंज़ीम के एक अहम रुकन मुहम्मद रऊफ़ साहब ने नुमाइंदा सियासत को बताया कि, फ़िलवक़्त 150 फ्लैट्स पर मुश्तमिल ये आलीशान इमारत ईदगाह मीरआलिम चौराहे कि करीब तामीर की गई है , जुमला 11 करोड़ रुपय के सर्फ़े से तामीर होने वाली ये 6 मंज़िला इमारत मजमूई तौर पर 3 हज़ार गज़ का अहाता करता है।

मिस्टर रऊफ़के मुताबिक़ एहसासए ग़ुर्बत, ग़ुर्बत से ज़्यादा तकलीफ दह शए होती है और उनकी तंज़ीम गरीब अफ़राद के इसी एहसास को ख़तम करके मआशी तौर पर एक मुसहतकम ज़िंदगी गुज़राने का मौक़ा फ़राहम करती है। इस वक़्त पूरे हैदराबाद में मैमन बिरादरी की जुमला आबादी तकरीबन 18 हज़ार है जिन में से मुतमव्विल(अमीर) अफ़राद अपनी जमात में मौजूद ग़रीबों की मआशी और तालीमी इस्तिहकाम के लिए हमातन मसरूफ़ ररहते हैं। कहा जाता है कि तिजारत इस बिरादरी की सरशत (खमिर) में दाख़िल है ,ये लोग रोड पर टहरकर मिर्ची भजए का कारोबार करलेंगे मगर किसी की नौकरी करना उन्हें गवारा नहीं और यही वजह है कि ये जमात ज़रूरत मंद अफ़राद को कारोबार के लिए सोने के इव्ज़ बेला सूदी क़र्ज़ भी फ़राहम करती है ताकि वो मआशी तौर पर ख़ुदकफ़ील बन सकें।

जहांतक फ्लैट का ताल्लुक़ है तो वो कहते हैं कि इस तरह के फ़लाही इक़दामात हिन्दू पाक के चंद और शहरों में भी अंजाम दिए जा रहे हैं ताहम इन में और इस तंज़ीम में फ़र्क़ ये है कि इस इमारत में किसी फ़र्द को मुस्तक़िल तोर पे र्कोई फ्लैट्स नहीं दिया जाता बल्कि ज़रूत मंद अफ़राद पर ये वाज़िह कर दी जाती है कि वो यहां पाँच ,दस बीस साल जितना अर्सा चाहे रह सकते हैं लेकिन मआशी तौर पर मुस्तहकम होने के बाद उन्हें ये मौक़ा दूसरे गरीब अफ़राद को फ़राहम करना होगा। और बाहमी खैरख्वाही के जज़बे से मामूर इस बिरादरी के अफ़राद इस शर्त की तकमील भी करते नज़र आरहे हैं।

फ्लैट्स की फ़राहमी के तरीका कार की वज़ाहत करते हुए उन्होंने कहा कि ज़रूरत मंद अफ़राद से 20 हज़ार रुपय डिपाज़िट के तौर पुरुलिया जाता है जो काबिल वापसी होताहै जबकि मनटननस के नाम पर माहाना सिर्फ़ 600 रुपय लिए जाते हैं। इस जमात की सरगर्मियां यहिं तक महिदूद नहीं हैं बल्कि इसके साथ साथ फ़िलहाल 600 बच्चों को नर्सरीता PG स्कालरशिपस भी फ़राहम करती है जिस पर सालाना 46 लाख रुपय ख़र्च होते हैं जबकि बेवाओं को माहाना पंद्रह सौ रुपय वज़ीफ़ा भी दिया जाता है जिसे ढाई हज़ार तक करने का इरादा है और वोह भी एकाऊंट सिस्टम के ज़रीया ताकि उन्हें आने जाने की ज़हमत भी ना करना पड़े ।

इसी तरह तिब्बी इमदाद केलिए एक मुक़ामी हॉस्पिटल के साथ मुआहिदा किया गया है जहां गरीब मैमन का ईलाज किया जाता है और उसके अख़राजात मज़कूरा जमात बर्दाश्त करती है। मिस्टर रऊफ़ के मुताबिक़ इन तमाम फ़लाही इक़दामात के लिए हुकूमत से कोई मदद नहीं ली जाती बल्कि सारे अख़राजात मैमन बिरादरी से ही हासिल की जाती हैं। ये सच्च है कि इस जमात की सारी सरगर्मीयां मैमन बिरादरी तक महिदूद है। ताहम इस काया मतलब नहीं कि ये लोग मुस्लमानों के दीगर तबक़ात की मदद नहींकरते ,हाँ ये बात ज़रूर है कि हैदराबाद मैमन हिलाई जमात के तहत जो ख़िदमात अंजाम दे जाती हैं वो सिर्फ़ मैमन बिरादरी तक महिदूद है।

ख़ुलासा तहरीर ये है कि मैमन बिरादरी ने अपने किरदारो अमल से ये साबित कर दिया है कि अपने हुक़ूक़ की बाज़याबी और मुआशरे में बिरादरान वतन के साथ सर उठा कर जीने के लिए सिर्फ़ हुकूमत के रहमोकरम पे रहने के बजाय अगर हम तालीमात नबवी और इरशाद ख़ुदावंदी (अदाएगी ज़कात और मसर्फ़े ज़कात) पर सच्चे दिल से अमल कर दिखाएं तो क़ौम मुस्लिम का शायद ही कोई फ़र्द बच्चे जो ग़ुर्बत की दलदल में फंस कर अपने इमान-ओ-अक़ाइद से समझौता करने पर तय्यार हो।

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