Wednesday , September 19 2018

गर्भपात के मुद्दे पर पोलैंड में सियासी तूफान, सड़कों पर लोग

पोलैंड इन दिनों गर्भपात कानून में बदलाव को लेकर हो रहे विरोध आंदोलनों के कारण चर्चा में है। पोलैंड में धुर दक्षिणपंथी पार्टी लॉ एंड जस्टिस की सरकार है जिसे संक्षिप्त में पीआईएस कहते हैं। पोलैंड की सरकार अपने फैसलों से लगातार खलबली मचाए हुए है। कभी वह शरणार्थियों को न लेने के मुद्दे पर यूरोपीय संघ के सामने सीना तान कर खड़ी हो जाती है तो कभी देश की न्यायपालिका पर शिकंजा कसती है। यही नहीं, पिछले दिनों पोलैंड की सरकार ने एक कानून बना दिया जिसके तहत यहूदी नरसंहार के लिए किसी भी तरह पोलैंड को दोष देना अपराध घोषित कर दिया गया। अब सरकार गर्भपात के कानून सख्त बनाने की तैयारी में थी लेकिन भारी विरोध के कारण फिलहाल उसे अपने कदम पीछे खींचने पड़े। 23 मार्च को 50 हजार से ज्यादा लोग राजधानी वारसॉ की सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने इसे ब्लैक फ्राइडे का नाम दिया और उनके हाथों में मौजूद तख्तियों पर लिखा था “स्टॉप” या फिर “हमें चॉइस चाहिए, दहशत नहीं।”

पोलैंड पूरी तरह से एक कैथोलिक देश है और वहां गर्भपात पर पहले से ही प्रतिबंध है। सिर्फ तीन परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति है। इनमें अगर मां की जान को खतरा हो, गर्भ बलात्कार या अनैतिक शारीरिक संबंधों का नतीजा हो या फिर गर्भ में पल रहे भ्रूण को कोई स्थायी नुकसान पहुंचने पर ही गर्भपात की अनुमति है। पोलैंड में जितने भी गर्भपात अभी तक होते रहे हैं उनमें 90 प्रतिशत तीसरी श्रेणी यानी भ्रूण को नुकसान होने की परिस्थिति के तहत होते रहे हैं। अब सरकार नए कानून के जरिए इसी तीसरी श्रेणी को खत्म करना चाहती है। सरकार देश में गर्भपात के लिए संभावनाओं को बेहद सीमित कर देना चाहती है। बीते डेढ़ साल में यह दूसरा मौका है जब पोलैंड में गर्भपात को लेकर सियासी बहस छिड़ी है। अक्टूबर 2016 में भी पोलैंड में गर्भपात पर लगभग पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग उठी थी। लगभग साढ़े चार लाख लोगों ने गर्भपात पर रोक के समर्थन में अपने हस्ताक्षर दिए थे। लेकिन उसके बाद एक लाख लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतरे जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं।

पीआईएस पार्टी के बहुत से सांसद गर्भपात विरोधी मुहिम के समर्थन में थे, लेकिन सरकार ने इससे दूरी बना ली। कैथोलिक चर्च भी गर्भपात पर रोक चाहता था, लेकिन 6 अक्टूबर 2016 को संसद में बिल पेश होने से पहले उसने अपना रुख तब्दील कर लिया। चर्च ने कहा कि उसे यह मंजूर नहीं है कि किसी महिला को गर्भपात कराने की वजह से जेल जाना पड़े। अब फिर पोलैंड उसी दोराहे पर खड़ा है. 2016 में गर्भपात विरोधियों को मिली नाकामी के बाद पीआईएस पार्टी के अध्यक्ष यारोस्लाव काचिंस्की ने कहा था कि उनकी पार्टी कानूनों में इस तरह के बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है जिससे विकलांग भ्रूण भी जन्म ले पाएं ताकि उनका “बपतिस्मा हो सके, उन्हें दफनाया जा सके और उन्हें एक नाम दिया जा सके।” पिछले दिनों कैथोलिक बिशपों ने फिर पोलिश सांसदों से कहा कि “वे इंसानी अस्तित्व के सभी पलों के प्रति अपना बिना शर्त समर्थन व्यक्त करें।” यानी वे उन बच्चों की वकालत कर रहे थे जो गर्भ में किसी विकृति का शिकार हो गए हैं।

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