Friday , September 21 2018

ग़ुस्सा, बीमारीयों और जराइम का अहम सबब

ग़ुस्सा इंसान को हैवान बना देता है। ग़ैर ज़रूरी बातों पर आपे से बाहर हो जाना सेहत के लिए भी मज़र्रत रसाँ है। इस लिए डॉक्टर्स भी ग़ुस्सा ना करने, ज़हनी दबाव से बचने और अपने आप पर क़ाबू पाने का मश्वरा देते हैं। ग़ुस्सा की ज़्यादती ब्

ग़ुस्सा इंसान को हैवान बना देता है। ग़ैर ज़रूरी बातों पर आपे से बाहर हो जाना सेहत के लिए भी मज़र्रत रसाँ है। इस लिए डॉक्टर्स भी ग़ुस्सा ना करने, ज़हनी दबाव से बचने और अपने आप पर क़ाबू पाने का मश्वरा देते हैं। ग़ुस्सा की ज़्यादती ब्लडप्रेशर में इज़ाफ़ा का बाइस बन जाती है और लोग ज़हनी दबाव का शिकार हो जाते हैं।

इंसानों की इसी कमज़ोरी को देखते हुए मुहसिन इंसानियत हुज़ूर-ए-अकरम सलल्लाह अलैहि वसल्लम ने ग़ुस्सा से गुरेज़ करने की हिदायत दी है। आज जितने भी जराइम और समाजी बुराईयों के वाक़ियात पेश आ रहे हैं वो ग़ुस्सा-ओ-ब्रहमी के बाइस ही वाक़े हो रहे हैं। ऐसे में ग़ुस्सा-ओ-ब्रहमी से इजतिनाब अक़्लमंदी है।

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