Tuesday , December 12 2017

ग़ैर मुस्लिमों में क़ुरआन मजीद के नुस्खे़ और सीरत की किताबों की मुफ़्त तक़सीम

हैदराबाद 23 जनवरी : इंसानों को हक़ का पैग़ाम देना उन्हें दोज़ख़ से बचाने स्रात मुस्तक़ीम के बारे में वाक़िफ़ करवाना जहालत से महफ़ूज़ रखते हुए तालीमात इस्लामी से बहरावर करवाना देन की दावत पेश करना और प्यारे नबी ई की सीरत मुबारका से

हैदराबाद 23 जनवरी : इंसानों को हक़ का पैग़ाम देना उन्हें दोज़ख़ से बचाने स्रात मुस्तक़ीम के बारे में वाक़िफ़ करवाना जहालत से महफ़ूज़ रखते हुए तालीमात इस्लामी से बहरावर करवाना देन की दावत पेश करना और प्यारे नबी ई की सीरत मुबारका से रोशनास करवाना , ऐसा मुक़द्दस फ़रीज़ा दावत है जिस में सुकून ही सुकून और इत्मीनान ही इतमीनान है ।

इन ख़्यालात का इज़हार सनअती नुमाइश की मशहूर-ओ-मारूफ़ अजंता गेट के बाहर मतला श्यान हक़ , और सच्चाई की तलाश में सरगरदां , अफ़राद में क़ुरआन मजीद के नुस्खे़ और सीरत रसूल ई की कुतुब मुफ़्त तक़सीम कररहे जनाब ताज उद्दीन ने किया । डीवीझ़नल पंचायत ऑफीसर की हैसियत से ख़िदमात अंजाम देते हुए सबकदोश हुए जनाब ताज उद्दीन गुज़शता चार बरसों से नुमाइश के मौक़ा पर बड़ी पाबंदी के साथ अजंता गेट के क़रीब इस्लामी तालीमात और सीरत मुबारका जानने के ख़ाहां ग़ैर मुस्लिमों में अंग्रेज़ी और तेलगु तराजुम के क़ुरआन मजीद और सीरत उन्नबी(सल.) की किताबें तक़सीम कर रहे हैं ।

वो अंग्रेज़ी तेलगु में ग़ैरमामूली उबूर रखते हैं । हम ने देखा कि वो नुमाइश के बाहर एक मेज़ पर क़ुरआन मजीद के नुस्खे़ और सीरत तुय्यबा के इलावा इस्लामी तालीमात पर तहरीर करदा मुख़्तलिफ़ किताबें रखे बैठे हैं । अक़ब (पीछे)में एक बोर्ड भी लगा हुआ है जिस पर अंग्रेज़ी और तेलगु में लिखा हुआ है कि क़ुरआन मजीद और पैग़ंबर इस्लाम ई की सीरत मुबारका के बारे में पढ़ने के ख़ाहां अफ़राद क़ुरआन मजीद और सीरत की कुतुब मुफ़्त हासिल कर सकते हैं ।

राक़िम उल-हरूफ़ ने देखा कि दिलचस्पी रखने वाले ग़ैर मुस्लिम मर्द-ओ-ख़वातीन और तलबा उन के हाँ आते जनाब ताज उद्दीन दस्ता 15 मिनट उन के साथ इस्लाम के बारे में गुफ़्तगु करते और फिर क़ुरआन मजीद का नुस्ख़ा उन्हें पेश करदेते साथ ही अपने रजिस्टर में क़ुरआन मजीद के नुस्खे़ (तरीके)और सीरत उन्नबी(सल.) की किताबें हासिल करने वालों के नाम पता और पेशे दर्ज करते जाते ।

अगरचे जनाब ताज उद्दीन ने दावत के इस ग़ैरमामूली काम के बारे में हम से किसी किस्म की बात करने से ये कहते हुए इनकार कर दिया कि वो अल्लाह और इस के रसोलऐ की रज़ा के लिए अपनी आख़िरत संवारने के लिए ये मुक़द्दस काम अंजाम दे रहे हैं और वो नहीं चाहते कि अख़बारात या मीडीया के ज़रीया उन की तशहीर हो ताहम हमारे ये कहने पर कि अख़बार ज़हन साज़ी का बेहतरीन ज़रीया होता है और चूँकि रोज़नामा सियासत को दुनिया के हर मुक़ाम पर पढ़ा जाता है मुम्किन है उन की इस के बारे में रिपोर्ट की इशाअत से दूसरों के दिल में भी दावत देन के काम का शौक़ पैदा हो । हमारी इस दलील से वो मुतास्सिर हुए और अपने काम के बारे में बताया ।

जनाब ताज उद्दीन के मुताबिक़ वो जमात-ए-इस्लामी की बिहार इस्लाम कान्फ़्रैंस में मसरूफ़ थे इस लिए जारीया साल उन्हों ने ये काम कुछ ताख़ीर से शुरू किया है लेकिन अल्लाह का शुक्र है कि हर रोज़ 40-50 क़ुरआन मजीद के नुस्खे़ और सीरत तुय्यबा की कुतुब हमारे ग़ैर मुस्लिम भाई हासिल करते हैं और अल्लाह से उम्मीद है कि वो इन ग़ैर मुस्लिम भाईयों के ज़हनों-ओ-क़ुलूब को हक़ की रोशनी से मुनव्वर कर देगा ।

जनाब ताज उद्दीन ने बताया कि गुज़शता चार बरसों में ज़ाइद अज़ 5000 ग़ैर मुस्लिम भाईयों और बहनों ने उन से इस्लाम और पैग़ंबर इस्लाम की हयात तुय्यबा के बारे में बातचीत की और क़ुरआन मजीद के नुस्खे़ हासिल किए साथ ही सीरत की किताबें भी बसद ख़ुलूस-ओ-एहतिराम ले गए अपने मक़सद के बारे में जनाब ताज उद्दीन ने बताया कि 2007 में मुलाज़मत से सुबकदोशी के बाद उन्हों ने तहय्या कर लिया कि अपनी माबक़ी ज़िंदगी तब्लीग़-ओ-दीन में मसरूफ़ करदेंगे चुनांचे(इसलिए) इस मुक़द्दस काम से उन्हें ऐसा सुकून मिलता है जिसे वो अलफ़ाज़ में बयान करने से क़ासिर हैं ।

दावत देन के काम के नतीजा में वो बिलकुल सेहत मंद , चाक़-ओ-चौबंद हैं और कभी बीमार नहीं होते जिस के लिए बारगाह इलहा में जितना भी शुक्र किया जाये कम है । हमेशा मुतमइन रहते हैं ये सब दावत देन की बरकत है । उम्मीद है कि जनाब ताज उद्दीन के काम को देखते हुए दूसरे रिटायर्ड हज़रात और नौजवान अपनी ज़िंदगी के क़ीमती वक़्त को दावत देन के लिए सिर्फ़ करेंगे ।।

TOPPOPULARRECENT