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गांधी जी का अदम तशद्दुद का नज़रिया आज ज़्यादा कारआमद: मेधा पाटकर

नामवर समाजी कारकुन मेधा पाटकर ने कहा कि महात्मा गांधी का अदम तशद्दुद का नज़रिया मौजूदा दौर में ज़्यादा कारआमद है और तजवीज़ पेश की कि सज़ाए मौत बर्ख़ास्त कर देनी चाहिए।

नामवर समाजी कारकुन मेधा पाटकर ने कहा कि महात्मा गांधी का अदम तशद्दुद का नज़रिया मौजूदा दौर में ज़्यादा कारआमद है और तजवीज़ पेश की कि सज़ाए मौत बर्ख़ास्त कर देनी चाहिए।

नर्मदा बचाओ आंदोलन की क़ाइद ने मज़ीद कहा कि अदम तशद्दुद का मतलब एहतेजाज को मज़ीद कारआमद बनाना होगा जब कि ममलकत और माएसट एक दूसरे के ख़िलाफ़ बंदूकें हाथ में लेकर जंग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि गरीब और नज़रअंदाज तबक़ा ज़्यादा पैदावार फ़राहम करते हैं और इमारतें तामीर करते हैं जिन्हें हम इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उन्ही अफ़राद का ज़्यादा इस्तिहसाल किया जाता है और उन्हें नज़रअंदाज किया जाता है।

उन्होंने कहा कि ममलकत अपने फ़राइज़ अदा करने और उनका साथ देने से क़ासिर है। मेधा पाटकर ने कहा कि इंसान से इंसान और इंसान से क़ुदरत के ताल्लुक़ात को उजागर करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि गांधी जी का ट्रस्टी शिप सिस्टम और इमदाद-ए-बाहमी के इलावा तबक़ात पर मबनी वसाइल को फ़रोग़ दिया जाना चाहिए।

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