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गांधी जी की सवाने उम्री के पंजाबी और कश्मीरी तर्जुमा की रस्मे इजरा

महात्मा गांधी की ख़ुदनौशत सवाने उम्री सदाक़त के बारे में मेरे तजुर्बे का पंजाबी और कश्मीरी तर्जुमा की रस्मे इजरा कल मुनाक़िद की जाएगी। ये किताब नवजीवन ट्रस्ट ने शाय की है, जिसे 1929 में ख़ुद गांधी जी ने क़ायम किया था, ताहाल उन की ख़ुदनौ

महात्मा गांधी की ख़ुदनौशत सवाने उम्री सदाक़त के बारे में मेरे तजुर्बे का पंजाबी और कश्मीरी तर्जुमा की रस्मे इजरा कल मुनाक़िद की जाएगी। ये किताब नवजीवन ट्रस्ट ने शाय की है, जिसे 1929 में ख़ुद गांधी जी ने क़ायम किया था, ताहाल उन की ख़ुदनौशत सवाने उम्री 17 ज़बानों तमिल‌ , कन्नड़, उर्दू, बंगाली, मलयाली, आसामी, उड़ीह, तेलुगू, मराठी, हिन्दी, अंग्रेज़ी, गुजराती, मनी पूरी, संस्कृत और कोंकणी में तर्जुमा करके शामिल की जा चुकी है।

इन तर्जुमों की इशाअत का मक़सद महात्मा गांधी की सवानिह उम्री को ज़्यादा से ज़्यादा अवाम तक पहुंचाना है। नवजीवन ट्रस्ट 30 ग़ैरमुल्की ज़बानों में भी सवानिह उम्री शाय करचुका है।

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