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गांवों के तरक़्क़ी का जिम्मा टाटा को सौंपने की तैयारी

जमशेदपुर/रांची : रियासती हुकूमत देही तरक्की का काम टाटा ट्रस्ट को सौंपने की तैयारी में है। ट्रांसफॉर्मिंग रूरल झारखंड (टीआरजे) मंसूबा के तहत टाटा और रियासती हुकूमत के दरमियान जल्दी ही एमओयू होने वाला है। इसके बाद रियासत भर के देही इलाकों में एनजीओ के जरिये से होने वाले तमाम काम ट्रस्ट को मिल सकता है। इसके लिए रियासती हुकूमत के आला अफसरों और ट्रस्ट के नुमाइंदों के दरमियान तीन दौर की इजलास हो चुकी हैं। बैठक में सेहत, तालीम ,आर्ट एंड कल्चर के शोबे में काम का फोकस प्वाइंट तय हो चुका है।
टाटा ट्रस्ट ने रियासत भर के देही इलाकों में एनजीओ के जरिये होने वाले काम करने की पेशकश की है। ट्रस्ट के साथ रियासत हुकूमत एमओयू करने पर संजीदगी से गौर कर रही है। हुकूमत के अफसर ट्रस्ट के नुमाइंदों से तीन बैठक कर चुके हैं। रियासती हुकूमत बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के साथ बिहार सरकार की तरफ से किए गए मूआहिदे के तर्ज पर झारखंड में टाटा ट्रस्ट के साथ एमओयू करना चाह रही है। देही इलाकों में एनजीओ से कराए जाने वाले काम टाटा ट्रस्ट को देने पर भी बातचीत चल रही है।

सरकार को दिए परपोजल में कहा गया है कि ट्रस्ट रियासत के सात हजार गांवों में टाटा सीएसआर के तहत ‘प्रदान’ अदारे के जरिये काम कर रहा है। इसलिए टीआरजे का काम ट्रस्ट के जरिये से कराए। इससे तेजी से तरक्की हो सकता है। ट्रस्ट में अलग-अलग रियासतों में हो रहे ऐसे कामों का हवाला भी दिया। इस मुद्दे पर 12 नवंबर को हुई बैठक में हुकूमत ने वजीरे आला की देखरेख में एक्शन कमेटी बनाने का परपोजल दिया है। साथ ही डेवलपमेंट कमिश्नर की सदारत में रियासती सतह स्टीयरिंग कमेटी बनाने के ड्राफ्ट और अपेक्स बॉडी में वजीरे आला के सेक्रेटरी और आला अफसरों को रखने पर भी बातचीत हुई।

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