गाय के नाम पर भडकाने के बावजूद भाजपा के कदम मजबूत

गाय के नाम पर भडकाने के बावजूद भाजपा के कदम मजबूत
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नई दिल्ली: पिछले तीन वर्षों में हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, असम, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और सबसे बढ़कर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में अपने मुख्यमंत्रियों को बिठाने वाली भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद अपना कद चरणबद्ध बुलंद किया और इस धारणा को बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं और भाजपा अब पूरे भारत में अपने अस्तित्व के साथ मौजूद है|

खास रूप में उत्तर प्रदेश की सफलता ने 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की संभावना उज्जवल कर‌ दिया हैं। उत्तर प्रदेश को लोकसभा में 80 सीटों का प्रतिनिधित्व प्राप्त है और पिछले आम चुनाव में राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य ने भाजपा के 71 सदस्यों को लोकसभा पहुंचाया था।

पर्यवेक्षकों के अनुसार जाहिर भाजपा भारत और विदेशी भारत अपनी दक्षिणपंथी राजनीति के साथ इस समय छाई हुई है। बहुतों का मानना ​​है कि अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य पर डोनाल्ड ट्रम्प के उद्भव एक नया विश्व दृश्य सेट होने जा रहा है। विदेश भारतीय मिशन प्रमुखों की एक चार दिवसीय सम्मेलन में यह बात शिद्दत से महसूस किया गया कि वैश्विक स्तर पर दक्षिणपंथी राजनीति की जो लहर चली है वह अब इसी तरह चलती रहेगी यह एक नया परिदृश्य है और भारत की स्थिति अज्यसुनाय नहीं है।

कुछ राजदूतों और सेवानिवृत्त राजनयिकों के कहना है कि गौ रक्षकों के सोड जैसी घटनाओं ने निस्संदेह भारत की छवि बिगाड़ना है। एक नज़र स्रोत ने यूएनआई को बताया कि गौ रक्षकों की हरकतों और दक्षिणपंथी राजनीति रहकर आभरबहत आई है। कोई यह नहीं कहता कि सरकार दक्षिणपंथी वालों सीमा छोड़कर गतिविधियों का समर्थन करती है लेकिन इस तरह की घटनाओं से भारत की छवि जरूर बिगड़ रही है।

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