गिलानी तौहीन अदालत केस में तफ़सीली फ़ैसले पर नाख़ुश

गिलानी तौहीन अदालत केस में तफ़सीली फ़ैसले पर नाख़ुश

वज़ीर-ए-आज़म पाकिस्तान यूसुफ़ रज़ा गिलानी तौहीन अदालत केस में सुप्रीम कोर्ट के तफ़सीली फ़ैसले पर ख़ुश नहीं हैं।वो जस्टिस आसिफ़ खोसा के शायरी के इक़तिबास (इस्तिमाल) पर भी नाख़ुश हैं। गिलानी ने न्यूज़वीक को बताया कि दुनिया की अदा

वज़ीर-ए-आज़म पाकिस्तान यूसुफ़ रज़ा गिलानी तौहीन अदालत केस में सुप्रीम कोर्ट के तफ़सीली फ़ैसले पर ख़ुश नहीं हैं।वो जस्टिस आसिफ़ खोसा के शायरी के इक़तिबास (इस्तिमाल) पर भी नाख़ुश हैं। गिलानी ने न्यूज़वीक को बताया कि दुनिया की अदालती तारीख़ में ये पहला फ़ैसला है जिस में ज़रूरत से ज़्यादा शायरी को इस्तिमाल किया गया।

उन्हों ने कहा कि क्या मुस्तक़बिल (भविष्य) में इस मुल्क के लोगों को शायरी की बुनियाद पर सज़ा दी जाय? मुल्क की आला अदलिया ने गिलानी को मुजरिम क़रार दिया है और अब वो क़ानून की नाफ़रमानी के मुर्तक़िब बन कर सयासी शहादत के मुतलाशी हैं। गिलानी का सूफीयों के ख़ानवादे से ताल्लुक़ का दावा इन के लिए एक अच्छी बात हो सकती है, उन्हें ओहदा छोड़ने के दबाव के सामने सब्र से काम लेने की ज़रूरत होगी। एक अमेरीकी जरीदे (पत्रिका ) के मुताबिक़ हुकमरान जमात समझती है कि अदालत के फ़ैसले ने दाएं बाज़ू के सियास्तदान नवाज़ शरीफ़ और इमरान ख़ान की हौसला अफ़्ज़ाई और हिमायत की है।

इस के जवाब में हुकमरान जमात दलायल देने की तैयारीयों में मसरूफ़ है कि अदालत शरीफ़ ब्रदर उन को वुकला तहरीक चलाने की वजह से हिमायत दे रही है। वज़ीर-ए-आज़म का कहना है कि वो अपने ओहदा को तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक वो अपने क़ानूनी इख़्तयारात को इस्तिमाल नहीं कर लेते। जरीदे (पत्रिका ) का कहना है गिलानी फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने जा रहे हैं। अगर फ़ैसला बरक़रार रहता है तो फिर उन की नाएहली (अयोग्यता) का सवाल पैदा होगा जिस का फ़ैसला स्पीकर क़ौमी असैंबली को करना है।

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