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गीता जयंती समारोह पर खर्च को लेकर विवादों में घिरी हरियाणा की खट्टर सरकार

नई दिल्ली। गीता जयंती समारोह के दौरान विवादों में घिरी हरियाणा सरकार ने इस बार गीता जयंती का बजट 25 करोड़ से पार कर दिया है।

इस आयोजन का सरकार व प्रदेश के लोगों को कितना लाभ हुआ, इसके बारे में तो स्थिति साफ नहीं हो सकी है, अलबत्ता करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद प्रदेश सरकार एक बार फिर से विपक्ष के निशाने पर आ गई है।

हाल ही संपन्न हुए गीता जयंती समारोह के दौरान ज्ञानानंद को जमीन देने, महंगे दामों पर गीता खरीदने तथा एक ही व्यक्ति को खाने का ठेका देने जैसे विवाद इस आयोजन के साथ जुड़े रहे हैं। समारोह समाप्त होने के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड ने इस बार के आयोजन पर 25 करोड़ रुपए से अधिक धनराशि खर्च डाली है। हालांकि किस मद पर कितना खर्च किया गया है, यह अभी सार्वजनिक किया जा रहा है लेकिन केडीबी का यह खर्च किसी के भी गले नहीं उतर रहा है।

हैरानी की बात यह रही है कि पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल में भी हर साल गीता जयंती का आयोजन किया जाता था, लेकिन इतना बजट कभी नहीं बढ़ा। हुड्डा सरकार के नौ वर्ष के कार्यकाल में जितनी धनराशि इस आयोजन पर खर्च की गई है, उससे छह गुणा अधिक धनराशि इस बार खर्च की गई है।

जानकारी के मुताबिक हुड्डा सरकार ने गीता जयंती समारोह के आयोजन के जितना कुल बजट नौ वर्ष में खर्च किया है। उतने बजट में इस बार मनोहर सरकार ने केवल पंडाल, लाइट व साउंड की व्यवस्था की है।

हरियाणा की वर्तमान बीजेपी सरकार ने सत्ता में आते ही गीता जयंती समारोह को अंतरराष्ट्रीय समारोह का दर्जा प्रदान किया था, जिसके चलते दो वर्षों में इस आयोजन का खर्च 40 करोड़ रुपए से भी पार जा चुका है।

हालांकि तथ्य यह है कि पिछले दो वर्षों से यहां तीन दर्जन भी विदेशी पर्यटक नहीं आए हैं। केडीबी से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2006 से लेकर 2014 तक गीता जयंती समारोह के आयोजन पर महज तीन करोड़ 82 लाख 48 हजार रुपए खर्च किए गए।

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