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गुजरात का “दंगाई” अपनी ग़लती से सबक़ लेकर मोहब्बत की राह पर, दलित आन्दोलन में भी होगा शामिल

गुजरात दंगों की दो तस्वीरें, राजनीतिक फ़ायदे के लिए भारत में दंगे आम हैं.

दशा, गुजरात: अशोक परमार के नाम से शायद कम लोग वाकिफ़ होंगे लेकिन उनकी तस्वीर से लगभग हर भारतीय परिचित होगा, गुजरात में हुए 2002 में मुस्लिम-विरोधी दंगों के दौरान उनकी लोहे की रॉड लिए हुए तस्वीर गुजरात में उस वक़्त हो रहे आतंक का उदाहरण सी बन गयी थी लेकिन वक़्त बीता और अशोक को ये समझ आया कि नफ़रत बहुत बुरी चीज़ है और उन्होंने तुरंत ही अमन का रास्ता अख्तियार कर लिया. उनकी ये तस्वीर सबस्तियन डी सूज़ा ने ली थी. समझने की बात है कि शुरुवात में उन्हें कोर्ट ने क्लीन चिट दी लेकिन बाद में गुजरात सरकार को लगा और उच्च न्यायलय में फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर दी. आज के राजनितिक और सामाजिक परिवेश में जहां दलित आन्दोलन की बयार चल पड़ी है और ख़ूब तेज़ी से दलित अपनी बात को आगे तक पहुंचाने में कामयाब हो पा रहे हैं.ऐसी ही एक दलित अस्मिता यात्रा में जो सावरकुंडला से 11 अगस्त को चलेगी में वो भी जायेंगे.
पेशे से मोची अशोक पिछले दिनों अक्सर अमन वार्ताओं में शामिल रहे हैं.

(ऊपर दी गयी तस्वीर में दाहिने अशोक की फ़ोटो है)

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