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गुजरात का ग़रीब माही गीर करोड़पती बन गया

गुजरात के इलाक़ा जामनगर का एक ग़रीब माही गीर जो समुंद्र में एक ग़रीब मछली पकड़ने वाले की हैसियत से दाख़िल हुआ था, इत्तिफ़ाक़ (संयोग) से क़ीमती मछलीयों का गोल इसके जाल में फंस गया, जिसके बाद वो एक करोड़पती शख़्स की हैसियत से समुंद्र के बाहर

गुजरात के इलाक़ा जामनगर का एक ग़रीब माही गीर जो समुंद्र में एक ग़रीब मछली पकड़ने वाले की हैसियत से दाख़िल हुआ था, इत्तिफ़ाक़ (संयोग) से क़ीमती मछलीयों का गोल इसके जाल में फंस गया, जिसके बाद वो एक करोड़पती शख़्स की हैसियत से समुंद्र के बाहर है।

ब्यान किया जाता है कि हसन वाघर जो इस इलाक़ा का एक ग़रीब माही गीर था, गुज़शता हफ़्ता माही गेरी के लिए कछ के जाखू इलाक़ा में गहरे समुंद्र के हदूद में दाख़िल हुआ जहां उसको ये क़ीमती मछलियां मिली थीं। हसन वाघर ने कहा कि मैं 380 क़ीमती मछलीयों पकड़ सका हूँ जिन की मलाईशीया और सिंगापुर मार्केटस में ज़बरदस्त मांग है। घोल कहलाई जाने वाली ये मछली 15 ता 20 किलोग्राम वज़नी होती है और 400 से 600 रुपय फ़ी किलो फ़रोख्त होती है। हसन के भाई हारून ने कहा कि अब ये ख़ज़ाना हाथ लगने के बाद हमारे मुश्किल के दिन गुज़र गए और उम्मीद है कि अब अच्छे दिन आयेंगे।

यहां ये बात काबिल-ए-ज़िकर है कि मानसून से क़ब्ल समुंद्र में तमूज का आग़ाज़ हो जाता है जिसके पेशे नज़र 14 मई को माही गेरी का मौसम ख़तम हो जाता है चुनांचे माही ग़ैरों को समुंद्री हदूद में दाख़िल होने के ख़िलाफ़ मुतनब्बा किया जाता है। हसन वाघर ने कहा कि ग़ालिबन मेरे मौसम की ये आख़िरी मुहिम थी जो ख़ुशबख्त साबित हुई।

मुझे इस क़दर क़ीमती मछली हाथ लगी है जिसकी मजमूई क़ीमत करोड़ों रुपय तक पहुंच सकती है और लोग मुझे करोड़पती के नाम से पुकारने लगे हैं। ये सुन कर मुझे अच्छा भी लगता है।

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