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गुजरात चुनाव से पहले एक नारे ने कैसे उड़ा दी बीजेपी की नींद

गुजरात विधानसभा चुनाव शुरू होने में महज अब दो महीने बचे हैं, पर सत्ताधारी बीजेपी की नींद गुजरात में चल रहे एक सोशल मीडिया कैंपेन ने हराम कर रखी है. कैंपेन का नाम है ‘विकास गांडो थायो छे’, जिसका मतलब हिन्दी में है ‘विकास पागल हो गया है’.
विकास के पागलपन की कहानी बताएं, उससे पहले यह बता दें कि इस सोशल मीडिया कैपेन से परेशान बीजेपी को पिछले दो हफ्ते में कई बार इस पर सफाई देनी पड़ी है. पर पहले जरा इन चुटकुलों को पढ़ि‍ए.
विकास को पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. गुजरात में 9 लड़कियों ने इसलिए सगाई तोड़ दी, क्योंकि उनका नाम विकास था. पेट्रोल की कीमत 80 रुपये हो गई है, क्योंकि विकास पागल हो गया है. विकास दर घट गई है, पर देश विकास कर रहा है, क्योंकि विकास पगला गया है.
यह सब पिछले एक महीने से गुजरात में सोशल मीडिया पर चल रहे चुटकुलों की कुछ बानगी भर है. वैसे सोशल मीडिया पर विकास गांडो थायो छे वाले हैशटैग के चुटकुले यू-ट्यूब वीडियो से अटे पड़े हैं.अब तो इस पर एप्लीकेशन और गेम की सीरीज भी बन चुकी है. गुजरात में इन दिनों हर की जुबान पर यही चढ़ा है.
सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में समस्याओं को विकास गांडो थायो छे के साथ जोड़कर मजे ले रहा है. अब तो ये बातचीत का कोडवर्ड भी हो गया है.

आखिर क्या है विकास गांडो थायो छे?
गुजराती में लिखे इस वाक्य का हिन्दी अनुवाद है, विकास पागल हो गया है. इसकी शुरुआत तब हुई, जब सागर सवालिया नाम के एक 20 साल के पाटीदार युवक ने गुजरात परिवहन की एक टूटी पहिये वाली बस पर लिखी लाइनों को फेसबुक पर पोस्ट किया. इसमें लिखा था परिवहन निगम की बस हमारी है, पर जब आप सफर करते हैं, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है. सफर करते रहिए, विकास पागल हो गया है.
इसे पोस्ट करते ही यह वायरल हो गया. सागर हार्दिक पटेल के आरक्षण आंदोलन में भाग ले चुका है.

 

क्या कांग्रेस को चुनावी संजीवनी मिली?
इस हैशटैग पर पाटीदारों के पोस्ट जैसे ही बढ़ने लगे, कांग्रेस और हार्दिक पटेल के संगठन की तरफ से इस कैपेन को हवा दी गई. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ने की रणनीति के खिलाफ इसे सोशल मीडिया कैंपेन बना लिया. गुजरात प्रदेश कांग्रेस और हार्दिक पटेल के पाटीदार समाज की डिजिटल आर्मी ने गुजरात सरकार और मोदी सरकार के विकास के दावों का मजाक उड़ाते हुए हजारों पोस्ट डाले.
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी और हार्दिक पटेल चुनावी कार्यक्रमों में जमकर विकास पागल हो गया है, पर चुटकी लेकर बीजेपी को बैकफुट पर खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं.
कांग्रेस की जमीन पर भले ही हालत पतली हो, लेकिन चुनावी कैंपेन के लिए कांग्रेस को एक नारा मिल गया है. पहली बार कांग्रेस समर्थित सोशल मीडिया कैंपेन वायरल होकर लोगों की जुबान पर चढ़ा है. कांग्रेस को लग रहा है कि ये नारा मेहनत करने पर वोटो में भी तब्दील हो सकता है. इससे कांग्रेस का थोड़ा-बहुत आत्मविश्वास लौटा है.
क्यों अमित शाह को गुजरात चुनाव में सोशल मीडिया से डर लगने लगा है?
अब तक हर चुनाव में सोशल मीडिया के जरिये एजेंडा चलाने वाली बीजेपी गुजरात में विकास गांडो छे के सामने कोई वैकल्पिक हैशटैग कायम नहीं कर पा रही और बीजेपी की डिजिटल आर्मी इस हैशटैग को ट्रेंड करने से रोक नहीं पा रही. अब तक सोशल मीडिया पर एकाधिकार बनाए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को अहमदाबाद में युवाओं के टाउनहॉल कार्यक्रम में कहना पड़ा:
“बीजेपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रहे अभियानों पर युवा ध्यान न दें. वे खुद अपनी समझ का इस्तेमाल करें और परखें कि गुजरात में बीजेपी के आने से पहले और उसके बाद कितना विकास हुआ है.”
अमित शाह ने कहा यह कैंपेन खास तौर पर कांग्रेस की तरफ से बीजेपी को बदनाम करने के लिए चलाया जा रहा है. लेकिन बीजेपी की चिंता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीजेपी आईटी सेल के अमित मालवीय की पूरी टीम अमित शाह के टाउनहॉल कार्यक्रम से पहले अहमदाबाद में विकास गांडो से निपटने में दिन-रात लगी रही.
हद तो तब हो गई, जब सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह माया कोडनानी मामले में गवाही देने गुजरात पहुंचे, तो कई हफ्ते ट्रेंड करने के बाद फिर से सोमवार को पूरे दिन वही नारा ट्व‍िटर पर ट्रेंड करता रहा.
इससे पहले 8 सितंबर को जूनागढ़ में एक प्रोजेक्‍ट का उद्धाटन करते हुए मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कैंपेन पर भड़ास निकालते हुए कहा कि कांग्रेस के राज में तो भ्रष्‍टाचार, महंगाई सारे पागल हो गए थे. कांग्रेस जनता को सोशल मीडिया पर बेवकूफ न बनाए.
गुजरात बीजेपी अध्यक्ष जीतू भाई तो कई बार विकास गांडो छे पर बरस चुके हैं. गुजरात के चुनाव प्रभारी बनने के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली के साथ सह प्रभारी रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण चुनावी रणनीति बनाने जब अहमदाबाद पहुंचीं, तो निर्मला को कहना पड़ा कि उस नारे से निपट लेंगे, कांग्रेस अपने घर को संभाले.
क्यों गुजरात है जरूरी?
कोई और पार्टी समझे या न समझे, लेकिन बीजेपी सोशल मीडिया की ताकत को समझती है. 2014 में मिले विशाल जनादेश और यूपी विधानसभा चुनाव के प्रचंड जीत में सोशल मीडिया का बड़ा योगदान रहा है. चुनावी माहौल बनाने में सोशल मीडिया की ताकत को बीजेपी आजमा चुकी है. जमीन पर मजबूत होने के बाद भी बीजेपी गुजरात में रिस्क नहीं ले सकती, क्योंकि गुजरात प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का गृहराज्य है. यहां कमजोर होने का संदेश भी बड़ा है और नतीजा भी.
आरक्षण के लिए पाटीदारों के आंदोलन और दलितों पर अत्याचार के मुद्दे भले ठंडे पड़ गए हों, लेकिन कई बार एक चिंगारी आशियाना को जलाने के लिए काफी होती है, इसलिए बीजेपी के लिए जरूरी है कि विकास को समय रहते पागलपन से बाहर निकालकर पटरी पर ले आए.

शंकर अर्निमेष जाने-माने जर्नलिस्‍ट हैं. इस आर्टिकल में छपे विचार उनके अपने हैं

साभार: द क्विंट

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