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गुजरात दंगों की खोजी पत्रकार राणा अय्यूब को कतर में बोलने से रोका गया

 

नई दिल्ली: भारतीय पत्रकार राणा अय्यूब को कतर में भारतीय दूतावास द्वारा 22 अक्टूबर को दोहा में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करने से रोका दिया गया था। दूतावास की यह कार्यवाही मोदी सरकार की और से एक गैर-शासकीय आदेश जैसी प्रतीत होती है । अय्यूब हाल ही में जारी पुस्तक, “गुजरात फाइल्स – एनाटोमी ऑफ़ अ कवर अप” की लेखिका हैं, यह पुस्तक 2002 के मुस्लिम विरोधी दंगों में भाजपा के वर्तमान पार्टी अध्यक्ष अमित शाह सहित कई शीर्ष अधिकारियों और नेताओं द्वारा निभाई गयी भूमिका पर आधारित है ।

अय्यूब, जिन्हें इंडियन एसोसिएशन ऑफ़ बिहार एंड झारखंड (IABJ) द्वारा दोहा, कतर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था, उन्हें आयोजकों ने बताया कि उन्हें आदेश मिले हैं कि या तो वे समारोह को रद्द कर दें या वक्ताओं की सूची से अय्यूब को ड्रॉप कर दें । पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के 85वें जन्म दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में अय्यूब के साथ-साथ, समाचार वेबसाइट twocircles.net के संस्थापक काशिफ-उल-हुदा भी वक्ता के रूप में आमंत्रित थे ।

IABJ संगठन की वेबसाइट के अनुसार यह संगठन भारतीय दूतावास, दोहा के संरक्षण में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (आईसीसी) की एक सहयोगी संस्था के रूप में कार्य करता है । भारी दबाव में, आयोजकों ने आईसीसी के अशोका हॉल में होने वाली मीटिंग को ऐन वक़्त पर रद्द कर दिया । अचानक कार्यक्रम के रद्द हो जाने पर, वहां पहले से पहुंचे हुए दर्शकों के एक हिस्से ने राणा अय्यूब से मिलने का फैसला किया और पास ही के एक रेस्टोरेंट में उनसे बात चीत की ।

राणा अय्यूब ने दा वायर से बातचीत में कहा: “जैसे ही मैंने ट्वीट किया कि मैं इस आयोजन में बोलने जा रही हूँ, मेरे पास आयोजकों का फ़ोन आया । उन्होंने बताया कि आईसीसी ने कहा है कि अगर राणा अय्यूब कार्यक्रम में बोलेंगी तब आईसीसी के हाल के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जायेगी और आयोजकों को अपने आयोजन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर लेने के लिए कहा गया ।”

राणा अय्यूब ने आगे बताया, “आयोजको को कहा गया था कि अगर मुझे वक्ताओं की सूचि से हटा दिया जाता है तब आईसीसी उन्हें कार्यक्रम करने से नहीं रोकेगा । लेकिन IABJ ने कहा कि वे ऐसा नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने मुझे विशेष रूप से आमंत्रित किया है ।” अय्यूब को “कलाम, अल्पसंख्यकों के सशक्तिकरण, दलितों और उनकी पुस्तक के निष्कर्षों” पर बात करने के लिए बुलाया गया था ।

IABJ ने अपने आधिकारिक निमंत्रण में राणा का वर्णन एक खोजी पत्रकार, लेखक और स्तंभकार के रूप में करते हुए लिखा था कि वह डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी और अपनी किताब गुजरात फ़ाइलों के बारे में बात करेंगी ।

आयोजकों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर दा वायर को बताया, “हम ए पी जे अब्दुल कलाम पर एक कार्यक्रम कर रहे थे । इसलिए, हमने राणा को बोलने के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन आईसीसी ने कार्यक्रम में उसके बोलने पर आपत्ति जताई। हमें कार्यक्रम रद्द करने के लिए नहीं कहा गया था लेकिन अय्यूब का नाम ड्रॉप करने के लिए कहा गया था।”

“हम ज्यादातर भारतीय दूतावास के संरक्षण में सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं। हम राजनीतिक कार्यक्रमों से दूर रहने की कोशिश करते हैं क्योंकि हम दूतावास के तहत पंजीकृत हैं। सच कहूँ तो, हमें अय्यूब की किताब के बारे में ज्यादा पता नहीं था, लेकिन जब हमारे जानने वाले कुछ लोगों ने एक वक्ता के रूप में उनकी सिफारिश की, तब हमने उन्हें आमंत्रित किया। लेकिन जब हमें निर्देश मिला, तब हमारे पास कार्यक्रम को रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था । आप समझ सकते हैं कि हम प्रवासी हैं और मुसीबत में नहीं पड़ना चाहते । केवल हमारे मुस्लिम नाम ही वर्तमान परिस्थितियों में आग में घी डालने का काम कर सकते हैं, “उन्होंने कहा ।

हालांकि IABJ के सदस्यों ने मामले में आईसीसी के हस्तक्षेप के बारे में अधिक जानकारी का खुलासा करने से इनकार कर दिया। सरकार के सूत्रों ने दा वायर को संकेत दिया है कि इस कार्यक्रम पर निर्देश नई दिल्ली से आये थे और स्थानीय भारतीय मिशन ने स्वतंत्र रूप से कोई निर्देश जारी नहीं किया था ।

कुछ सरकारी अधिकारियों से स्वतंत्र पूछताछ में पता चला है कि नई दिल्ली से आदेश मिलने के बाद, दोहा में प्रेस और शिक्षा और भारतीय दूतावास के वाणिज्यिक प्रतिनिधि के लिए प्रथम सचिव, दिनेश उदेनिया ने आईसीसी के अध्यक्ष गिरीश कुमार को फोन कर इस कार्यक्रम की मुख्य वक्ता के बारे में मोदी सरकार के विचारों से अवगत कराया था ।

उदेनिया और भारतीय दूतावास के अन्य अधिकारी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके।

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