Thursday , December 14 2017

गुजरात दंगों को लेकर रमेश और अमित शाह में कहासुनी

मरकज़ी वज़ीर जयराम रमेश और बीजेपी लीडर शाह के बीच गुजरात में 2002 में भड़के दंगों को लेकर जुमेरात के रोज़ कहासुनी हो गई| जब रमेश ने कहा कि एसआईटी की तरफ से नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट कुबूल करने वाली अहमदाबाद की अदालत रियासती हुकूमत क

मरकज़ी वज़ीर जयराम रमेश और बीजेपी लीडर शाह के बीच गुजरात में 2002 में भड़के दंगों को लेकर जुमेरात के रोज़ कहासुनी हो गई| जब रमेश ने कहा कि एसआईटी की तरफ से नरेंद्र मोदी को दी गई क्लीन चिट कुबूल करने वाली अहमदाबाद की अदालत रियासती हुकूमत के दबाव में हो सकती है|

मोदी के करीबी साथी शाह ने इस इल्ज़ाम पर रमेश पर पलटवार करते हुए कहा कि मुकामी अदालतें रियासती हुकूमतो से अलग और बतौर आज़ादी से काम करती हैं और आली अदलिया के तहत होती हैं| उन्होंने कहा कि यूपीए हुकूमत अपने इक्तेदार के रिकार्ड पर बहस करने से बचती है और इंतेखाबात में पोलारिजेशन (Polarization) के लिए 2002 के दंगों को उठाती है|

गुजरात के साबिक वज़ीर ए दाखिला ने इस इल्ज़ाम की भी तरदीद की कि मोदी मुस्लिम मुतास्सिरो से मिलने नहीं गये थे शाह ने कहा कि मोदी आठ मुस्लिम कैंपो में गये थे और उन्होंने इस फिर्के की मआशी तरक्की के लिए काम किया | जब शाह ने दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मुकर्रर एसआईटी की क्लीन चिट की बात की तो रमेश ने कहा कि निचली अदालत कहां है? अहमदाबाद में. एक टीवी चैनल के प्रोग्राम में बहस के दौरान शाह ने कहा कि वे यह नहीं कह सकते कि राहुल उनके वज़ीर ए आज़म के ओहदे के उम्मीदवार हैं लेकिन आप जहां भी जाओ और मैं भी उत्तर प्रदेश और गुजरात में जहां जा रहा हूं, कांग्रेस के मुहिम में और पोस्टरों में सारा ध्यान उन्हीं (राहुल) पर है|

रमेश ने कहा कि मुहिम के पहले मरहले में यह बात सही हो सकती है क्योंकि पार्टी जनता को बताना चाहती है कि उनके नायबसदर राहुल गांधी तथा मोदी व आप के लीडर अरविंद केजरीवाल में क्या फर्क है| उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हमारा मुहिम प्रोग्रामों , एजेंडा और वायदों पर होगा|

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