Monday , December 18 2017

गुजरात : नोटबंदी से भाजपा में बग़ावत के संकेत

अहमदाबाद: गुजरात में जिला कोऑपरेटिव बैंकों में भी नोटबंदी का फैसला आने के बाद अन्य बैंकों की तरह ही कारोबार चल रहा था |  लेकिन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 12 नवंबर को अचानक जिला सहकारी बैंकों को एक सर्कुलर जारी कर पुराने नोट लेने पर बैन लगा दिया |  एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस फैसले से राज्य में सबसे ज्यादा भाजपा के नेता ही भड़के हुए हैं |

लेकिन ये देखना ज़रूरी है कि आखिर इस तरह का फैसला लेने की जरूरत क्यों पड़ी | नोटबंदी के फैसले के बाद जिला सहकारी बैंकों में भी अन्य बैंकों की तरह पुराने नोट जमा करवाना शुरू हुए | जिसके बाद जिला सहकारी बैंकों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की गुजरात सरकार को शिकायत मिलना शुरू हो गयी |सहकारी बैंकों में ज्यादातर किसानों के बैंक खाते ही होते हैं| गांव की सहकारी मंडली के पास उन्हें लोन वगैरह लेने के लिए जाना होता है |  किसानों की कमाई पूरी तरह टैक्‍स फ्री होने की वजह से इन बैंकों का इस्तेमाल होने के आरोप लगे |
गौरतलब है कि सहकारी मं‍डलियों का राज्य की राजनीति में बड़ा रोल रहता है | इसीलिए राज्य के करीब 18 जिला सहकारी बैंकों में से ज्यादातर के चेयरमैन राजनीतिज्ञ ही हैं | 15 से ज्यादा के जिला सहकारी बैंकों के चेयरमैन भाजपा से जुड़े लोग और एक बैंक कांग्रेस के पास है|  रिजर्व बैंक ने भी अफरा-तफरी में पहले गुजरात में फिर देश भर में इन सहकारी बैंकों पर बैन लगाया है |

विट्ठल रादडिया जो भाजपा के सांसद और राजकोट जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन हैं, ने कहा कि गांव के किसान इस फैसले से बेहाल हो गये हैं |  उनके पास कहीं बाहर जाने के लिए पैसे नहीं बचे हैं | रिज़र्व बैंक के इस तुगलकी फैसले से ग्रामीण इलाकों में बदहाली हो गई है और ये बहुत निंदनीय है |

इस पूरे फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ बताने वाली भाजपा के लिए ये स्थिति धर्मसंकट की है | क्यूंकि उन बैंकों के काम जल्दी शुरू करवाने की भाजपा पैरवी कर रही है जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं|  लेकिन इस बीच किसानों की स्थिति मुश्किल होती जा रही है क्योंकि उनके खाते ज्यादातर इन बैंकों में हैं |

खास बात ये है कि मोदी की अपनी राज्य सरकार भी केंद्र के इस फैसले के खिलाफ खड़ी नजर आ रही है| गुजरात के उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री नितिन पटेल ने कहा कि कोऑपरेटिव बैंक हरेक छोटे छोटे डिस्ट्रिक्ट में हैं और उनकी शाखायें ज्यादातर गांवों में हैं और किसान लोगों के अकाउंट इन बैंक में हैं|  ऐसे में डिस्ट्रिक्‍ट कोऑपरेटिव बैंको को भी बैंकिंग कामकाज शुरू करने की मंजूरी देते हुए रिजर्व बैंक को जो भी छानबीन करनी हो वो जल्दी से जल्दी कर लेनी चाहिए |

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