गुजरात: भेद भाव के शिकार दलित दिया जलाने की जगह होली दहन करेंगे

गुजरात: भेद भाव के शिकार दलित दिया जलाने की जगह होली दहन करेंगे
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गांधीनगर:गांधीनगर गुजरात में हो रहे दलित परिवारों पर अत्याचार के कारण पिछले एक महीने से अधिक समय से अपने हक़ के लिए विभिन्न जिलों में अनशन पर हैं. लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक उनके लिए कोई संतोषजनक क़दम नहीं उठाया गया है. जिससे नाराज होकर दलित परिवारों ने दिवाली न मना कर होली दहन करने का फैसला किया है.

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नेशनल दस्तक के अनुसार गुजरात में अनशन कर रहे 10 परिवार में से सिर्फ 6 की मांगें सुने जाने का आश्वासन मिला है. बचे 4 को अभी तक इंतजार है. दरदर की ठोकर खाती, भटकती दलित परिवार का न तो सरकार सुध लेने वाला है और न ही प्रशासन. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस गुजरात को भारत का मॉडल राज्य कहा जाता है वहां की सरकार और प्रशासन की स्थिति कितनी जर्जर है.
गौरतलब है कि गुजरात के गांधीनगर में विभिन्न जिलों के 10 दलित परिवार लगभग डेढ़ महीने से अनशन पर हैं. आपको बता दूँ कि वर्षों से उपरी जाति के लोगों द्वारा इनके साथ ज्यादती की जा रही है. लेकिन इनको प्रसाशन ने पूरी तरह से अनदेखी की है। अनशनकारी पीड़ित दलितों को हत्या, सामाजिक बहिष्कार, समाज निकाला, झूठे मामलों के केस और जबरन पलायन करने के लिए मजबूर जैसे अत्याचारों से जूझना पड़ रहा है.
उल्लेखनीय है कि इस अनशन में पुलिस प्रशासन के सताए लोग भी शामिल हैं. वहीँ उना अत्याचार मामले के खिलाफ लड़ रहे जिग्नेश मेवानी को सरकार से उनकी मांग को पूरा करने का आश्वासन मिला है इसी से इन्हें भी न्याय की उम्मीद जगी है. इसीलिए वे अभी तक अनशन पर डटे हैं।

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