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गुजरात फ़सादाद पर माज़रत ख़्वाही के लिए अदम आमादा मोदी को मजबूर करना लाहासिल

गुजरात फ़सादाद 2002 के लिए माज़रत ख़्वाही नरेंद्र मोदी की दिल से होना चाहीए। उन्हें माज़रत ख़्वाही के लिए मजबूर करना बेकार साबित होगा। कांग्रेसी क़ाइद सचिन पायलट ने सदर बी जे पी राजनाथ सिंह के इस तबसरे को रद‌ कर दिया कि चीफ़ मिनिस्टर गुजर

गुजरात फ़सादाद 2002 के लिए माज़रत ख़्वाही नरेंद्र मोदी की दिल से होना चाहीए। उन्हें माज़रत ख़्वाही के लिए मजबूर करना बेकार साबित होगा। कांग्रेसी क़ाइद सचिन पायलट ने सदर बी जे पी राजनाथ सिंह के इस तबसरे को रद‌ कर दिया कि चीफ़ मिनिस्टर गुजरात फ़सादाद के सिलसिले में शर्मिंदा हैं। मर्कज़ी वज़ीर ने जो कांग्रेस के नायाब सदर राहुल गांधी की टीम के एक अहम रुकन हैं, अपना एहसास ज़ाहिर किया कि बी जे पी की तरफ‌ से मोदी को विज़ारत अज़मी का उम्मीदवार ज़ाहिर करने की ख़ुद उनकी पार्टी से ज़्यादा कांग्रेस की तरफ‌ से ताईद की जाएगी।

उन्होंने याददेहानी की कि जब लाल किशन अडवाणी को 2009 में अपोज़िशन पार्टी का विज़ारत अज़मी का उम्मीदवार नामज़द किया गया था तो कांग्रेस की नशिस्तों में 50 का असाफ़ा होगया था। उन्होंने कहा कि अगर कोई शख़्स किसी शख़्स को कोई काम करने खासतौर पर माज़रत ख़्वाही के लिए मजबूर करें तो ये माज़रत ख़्वाही बेफ़ाइदा होगी। माज़रत ख़्वाही तो दिल से की जानी चाहीए। अगर कोई माज़रत ख़्वाही करना चाहता हैं तो उसे तहे दिल से माफ़ी तल्ब करनी चाहीए। उन्होंने याददेहानी की कि वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने सिख दुश्मन फ़सादाद के बारे में ऐवाने पार्लियामेंट में क्या तबसेरा किया था।

सचिन पायलट ने कहा कि मनमोहन सिंह ने कहा था कोई भी मेरे सर पर बंदूक़ की नाल रख कर मुझ से माज़रत ख़्वाही की मांग नहीं कर सकता। माज़रत ख़्वाही तो तहे दिल से होती है। सचिन पायलट ने कहा कि वज़ीर-ए-आज़म को जो कुछ कहना था उन्हींने बरसर-ए-आम कह दिया लेकिन अगर कोई शख़्स जो इस ओहदे की गर्द को भी नहीं पहुंच सकता फिर उसे कोई माज़रत ख़्वाही केलिए कैसे मजबूर करसकता है। सचिन पायलट इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या कांग्रेस को मोदी से गुजरात फ़सादाद के लिए माज़रत ख़्वाही का मुतालिबा करना चाहीए।

उनसे सदर बी जे पी राजनाथ सिंह के हालिया तबसरों के बारे में भी रद्द-ए-अमल ज़ाहिर करने की ख़ाहिश की गई थी कि नरेंद्र मोदी तशद्दुद पर शर्मिंदा हैं। सचिन पायलट ने कहा कि अगर किसी शख़्स को माज़रत ख़्वाही में यक़ीन ना होतो ऐसी माज़रत ख़्वाही से कोई फ़ायदा नहीं। हक़ीक़त कहीं ना कहीं ज़ाहिर होकर रहती है लेकिन बुनियादी चीज़ अपना इर्फ़ान हासिल होना है। में बहुत सी अच्छी बातें कह सकता हूँ लेकिन आख़िर कार यही देखा जाएगा कि मेरी शख़्सी हक़ीक़त क्या है इस लिए मेरे ख़्याल में किसी की शख़्सियत का ताय्युन इस के टी वी प्रोग्रामों की टी आर पी से नहीं किया जाता बल्कि इस के बाहर किया जाता है।

आइन्दा लोक सभा इंतेख़ाबात और जारीया साल मुक़र्रर असेम्बली इंतेख़ाबात के बारे में सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि लोक सभा इंतेख़ाबात में कांग्रेस की क़ियादत राहुल गांधी करेंगे। उनसे सवाल किया गया था कि क्या उन्हें नरेंद्र मोदी का मुक़ाबला करने विज़ारत अज़मी का उम्मीदवार मुक़र्रर किया जाएगा। उन्होंने इसका रास्त जवाब देने से गुरेज़ किया। सिर्फ़ इतना कहा कि वज़ीर-ए-आज़म हिन्दुस्तान के ओहदे के लिए सिर्फ़ ऐसा शख़्स मौज़ूं हो सकता है जो ज़ात पात,मज़हब ,ज़बान से बाला-ए-तर हूँ और ऐसा शख़्स सिर्फ़ राहुल गांधी हैं।

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