Tuesday , December 12 2017

गुजरात फ़सादाद फ़रामोश मोदी का बाईकॉट ख़त्म

बर्तानिया ने 2002 गुजरात फ़सादाद पर रियासत का तक़रीबन एक दुहा तवील बाईकॉट आज ख़त्म कर दिया है । ताहम ( फिर भी) वाज़िह ( स्पष्ट) किया कि ये फ़ैसला चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी की तौसीक़ ( समर्थन) तसव्वुर नहीं किया जाना चाहीए ।

बर्तानिया ने 2002 गुजरात फ़सादाद पर रियासत का तक़रीबन एक दुहा तवील बाईकॉट आज ख़त्म कर दिया है । ताहम ( फिर भी) वाज़िह ( स्पष्ट) किया कि ये फ़ैसला चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी की तौसीक़ ( समर्थन) तसव्वुर नहीं किया जाना चाहीए ।

गुजरात में बिज़नेस और तिजारती मौक़े में इज़ाफ़ा की ख़ाहिश करते हुए बर्तानवी हाई कमिशनर मुतय्यना हिंद जेम्स ब्योन ने आज चीफ़ मिनिस्टर नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की जो तक़रीबन 50मिनट जारी रही । बादअज़ां बर्तानवी सफ़ीर ( राजदूत) ने कहा कि ये फ़ैसला बर्तानवी क़ौमी मुफ़ाद ( राष्ट्रीय हित) में है ।

उन्हों ने कहाकि गुजरात के साथ सरगर्म शराकत दुरुस्त सिम्त में जारी है और ये बर्तानिया के मुफ़ाद ( फायदे) में है। ब्योन ने कहा कि ये राबिता (संबंध) बहैसीयत मजमूई गुजरात रियासत के साथ क़ायम किया जा रहा है और उसे किसी इन्फ़िरादी ( व्यक्तिगत) शख़्स से मरबूत (जोड़ना/ मिलाना) नहीं किया जाना चाहीए ।

उन्होंने इस नुक़्ता-ए-नज़र से इत्तिफ़ाक़ नहीं किया कि बर्तानिया ने नरेंद्र मोदी के साथ रवाबित उस्तिवार किए । उन्हों ने कहा कि अगर हम किसी और रियासत ( राज्य) में भी इसी तरह की शराकत के ख़ाहां हों तो हमें इस रियासत के चीफ़ मिनिस्टर से मुलाक़ात करनी होती है ।

नरेंद्र मोदी ही गुजरात के जमहूरी ( सार्वजनिक) तौर पर मुंख़बा ( चयनित) लीडर हैं । बर्तानिया ने 2002 फ़िर्कावाराना फ़सादाद के बाद जिस में 3 बर्तानवी शहरी भी निशाना बने थे गुजरात के साथ रवाबित मुनक़ते कर ( तोड़) लिए थे । बादअज़ां ( इसके बाद) नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि आज की मुलाक़ात काफ़ी अच्छी रही जिस का मक़सद मआशी-ओ-समाजी शोबों ( Sectors) में गुजरात ।

बर्तानिया रवाबित को मुस्तहकम ( मजबूत) करना था । ब्योन से जब ये पूछा गया कि क्या नरेंद्र मोदी को बर्तानिया वीज़ा मंज़ूर करेगा उन्हों ने कहा कि ये एक फ़र्ज़ी सवाल है क्योंकि नरेंद्र मोदी ने किसी वीज़ा के लिए दरख़ास्त नहीं दी । जब कभी ऐसा मुआमला दरपेश होगा तो उस वक़्त के हालात की मुनासबत से निमटा जाएगा ।

अगरचे नरेंद्र मोदी के साथ दुबारा शराकत ( भागीदारी) का फ़ैसला मुजव्वज़ा ( तय किया हुआ) गुजरात असेंबली इंतिख़ाबात से ऐन क़बल किया गया है ब्योन ने इन अंदेशों को मुस्तर्द ( नरस्त) कर दिया कि इस से इंतिख़ाबी नताइज पर असर पड़ेगा । रियासत में दिसम्बर में इंतिख़ाबात ( चुनाव) हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम किसी भी तरह इंतिख़ाबात में मुदाख़िलत (हस्तक्षेप/ रुकावट) का इरादा नहीं रखते ।

रियासत का इक़तिदार ( शासन) किसे हासिल हो ये फ़ैसला गुजरात के अवाम ख़ुद करेंगे और उनका ये एहसास है कि गुजरात के राय दहिंदगान महिज़ बर्तानवी हाई कमिशनर की मुलाक़ात की बुनियाद पर इंतिख़ाबी फ़ैसला नहीं करेंगे । ब्योन ने गुजरात के साथ दुबारा रवाबित उस्तिवार किए जाने को माक़ूलीयत पसंद फ़ैसला क़रार देने की कोशिश की और उन्होंने वज़ाहत की कि 2002 में फ़िर्कावाराना फ़सादाद पेश आए और इसके दस साल बाद कई अहम वाक़ियात रौनुमा हुए ।

हुकूमत बर्तानिया जो 2010 में मुंतख़ब हुई इसने फ़ैसला किया कि हिंदूस्तान के साथ रवाबित को ज़्यादा मुस्तहकम ( मजबूत) बनाया जाया । चुनांचे इस मक़सद के लिए मुल़्क की सब से अहम रियासत को नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता जो गुजरात है । इसके इलावा दस साल में रियासत गुजरात में ज़्यादा ख़ुशहाली आई और ये कामयाब रियासत साबित हुई ।

बर्तानिया में गुजराती अवाम की कसीर ( ज्यादा) तादाद आबाद हैं और गुज़शता दस साल के दौरान गुजरात बर्तानिया के लिए ज़्यादा एहमीयत का हामिल (के लायक) हो गया है । यही नहीं बल्कि दस साल में क़ानूनी अमल भी काफ़ी आगे बढ़ गया और इस के नतीजा में 2002 फ़सादाद के कई मुजरिमीन बिशमोल ( जिसमें) हुकूमत गुजरात के साबिक़ रुकन ( सदस्य) को सज़ाएं सुनाई गई ।

ख़ुसूसी एस आई टी अदालत ने बी जे पी लीडर और साबिक़ रियास्ती वज़ीर माया कोडनानी को नरोडा पाटिया मुक़द्दमा में सज़ा ए उम्र क़ैद सुनाई है । ये वाज़िह ( स्पष्ट) नहीं हो सका कि ब्योन और मोदी की मुलाक़ात में 2002 फ़सादाद भी ज़ेर-ए-बहस आई या नहीं ।

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