गुलबर्ग नरसंहार: दंगों में मुसलमानों के हत्यारों पर अदालते क्यूँ नर्म हो जाती हैं ?

गुलबर्ग नरसंहार: दंगों में मुसलमानों के हत्यारों पर अदालते क्यूँ नर्म हो जाती हैं ?
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गुलबर्ग सोसायटी हत्याकांड को लेकर वरिष्ठ पत्रकार अमितसेन गुप्ता का कहना है कि जैसे संसद पर हमले के मामले में अफ़ज़ल गुरु को फांसी दी गई, इस मामले में भी वैसा ही कड़ा रुख़ अपनानया जाना चाहिए.

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कांग्रेस के भूतपूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी जाकिया जाफ़री ने ऊपरी अदालत में अपील करने की बात कही है.उन्होंने बताया ये इन्साफ नही है

वरिष्ठ पत्रकार अमित सेन गुप्ता ने गुजरात दंगो के दर्द को मुसलमानों को भुलाने के जैसी नसीहत को खतरनाक बताते हुए कहा कि समाज पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ जाता तो हम आज हिटलर के जनसंहार की बातें नहीं कर रहे होते और जर्मनी इस बात के लिए माफ़ी नहीं मांग रहा होता कि तुर्की में आर्मेनियाई लोगों को मारा गया.

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