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गुस्ताखाना फ़िल्म पर पाबंदी लगाने-ओ-फ़िल्म प्रोडयूसर को सज़ा-ए-देने का मुतालिबा

हैदराबाद २०सितंबर (प्रैस नोट) जनाब सय्यद वहीद उद्दीन जाफरी ने अपने एक सहाफ़ती ब्यान में कहा कि हम को इस बात पर फ़ख़र हीका हम इस नबी मुकर्रम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम का कलिमा पढ़ते हैं जो एक लाख चौबीस हज़ार पैग़म्बरों में सब से अफ

हैदराबाद २०सितंबर (प्रैस नोट) जनाब सय्यद वहीद उद्दीन जाफरी ने अपने एक सहाफ़ती ब्यान में कहा कि हम को इस बात पर फ़ख़र हीका हम इस नबी मुकर्रम सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम का कलिमा पढ़ते हैं जो एक लाख चौबीस हज़ार पैग़म्बरों में सब से अफ़ज़ल हर चंद के इन अनबया-ए-में उलुलअज़म पैग़ंबर नूह, इबराहीम, मूसा, ईसा अलैहिम अस्सलाम भी शामिल हैं मगर जो वहदत पैग़ंबर इस्लाम की है ऐसी किसी की नहीं।

रसूल ख़ुदा ई फ़रमाते हैं कि कनत नबीह-ए-ओ- आदम बैन उलमा-ए-वालतीन में इस वक़्त भी नबी था जब कि आदम आब-ओ-गुल के दरमयान थी। कहीं साइल के
सवाल करने पर पैग़ंबर इस्लाम ने फ़रमाया औल्मा ख़लक़-उल-ल्लाह नूरी अल्लाह ने सब से पहले मेरे नूर को ख़लक़ किया। दरयाफ़त किया गया किस के नूर से फ़रमाया मन नूर अल्लाह अल्लाह के नूर सी।

कहीं फ़रमाया औल्मा ख़लक़-उल-ल्लाह हो उल-क़लम, मशीयत लौह, अक़ल अलख & मक़सद ख़ुदा की तकमील की ख़ातिर जो ज़ाहिर होता है वो ख़ाहिशात नफ़सानी से मुबर्रा होता ही। आख़िर में फ़िर्क़ा शीया इमामिया असना अशरी की जानिब से मज़हबी वकील की हैसियत से सदर जमहूरीया हिंद-ओ-वज़ीर-ए-आज़म से दरख़ास्त करता हूँ

कि तमाम आलम के मज़हबी-ओ-अख़लाक़ी-ओ-इंसानी हुक़ूक़-ओ-मुस्लमानों के जायज़ जज़बात-ओ-एहतिजाज को पेशे नज़र रखते हुए तमाम ममालिक के सदूर-ओ-वुज़रा का यू एन ओ में हंगामी इजलास तलब करते हुए हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सिल्ली अल्लाह अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताख़ी करने वाले फ़िल्म को ना सिर्फ रुकवाएं बल्कि इस फ़िल्म के प्रोडयूसर के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त तर सज़ा-ए-दिलवाकर दुनिया के तमाम मुस्लमानों-ओ-संजीदा ग़ैर मुतअस्सिब मजरूह क़ुलूब के तसकीन का बाइस बनें।

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