गैस के आटोज़ से धमाके का अंदेशा

गैस के आटोज़ से धमाके का अंदेशा

हैदराबाद: शहर हैदराबाद की एक पहचान‌ यहां की सड़कों पर बे ढंग अंदाज़ में दौड़ते हुए आटोज़ भी हैं और लोगो के साथ आटो वालों का बरताव शहरीयों के लिए अपनी तरह की एक अलग बेहस है जब कि ट्राफिक जाम और सिगनल पर खड़ी दर्जनों गाडियों को बे दरेग़ धोईं से परेशान करते हैं।

वायु प्रदूषण को कम करने के लिए आटोओं में सी एन जी और एलपी जी ईंधन को पेश किया गया। 1999 में पलोशन कंट्रोल बोर्ड ने सरकार‌ को चेतावनी दी थी कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए उन्ही आटोज़ को रजिस्ट्रेशन की इजाज़त दी जाये जो गैस को बतौर ईंधन इस्तेमाल करते हो जिसके बाद 2010 में सरकार‌ ने जी ऐच एमसी के सीमा में सी एन जी सुझाव‌ करवाया।

अंदाज़े के मुताबिक़ हैदराबाद में इस वक़्त देढ़ लाख आटोज़ मौजूद हैं जिनमें 90 हज़ार एलपी जी और 60 हज़ार सी एन जी पर चलते हैं । गैस सीलिंडर क़ाएदे दफ़ा 35 के तहत एलपी जी गाड़ी का 5 साल में एक बार‌ और सी एन जी गाड़ी का 3 साल में एक बार‌ मुआइना ज़रूरी है जिसके बाद आर टी ए की ओर‌ से फ़िटनैस पर मिट जारी किया जाता है और ये मुआइना मुक़र्ररा मुद्दत में किया जाता रहना ज़रूरी है।

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