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गोडसे को पूजने वाले देशभक्त !

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आस पास, गली मोहल्ले यहाँ तक कि आपकी फेसबुक फ्रेंड लिस्ट में भी ऐसे
लोगों ने जगह बनायी हुई है जो अपने आपको हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा “देश
भक्त” तो कहते हैं लेकिन देशभक्ति के नाम पे जो ये करते हैं वो इनके देश
द्रोही होने का प्रतीक है. महात्मा गाँधी कौन थे, उन्होंने इस मुल्क के
लिए क्या नहीं किया फिर भी अगर आप उनकी राय से अलग राय के हैं तो आपको
ऐसा होने का हक़ है लेकिन आपको उन्हें गाली देने का कोई हक़ नहीं है, उनपे
ग़लत-सलत इलज़ाम लगाने का हक़ भी नहीं है. ये लोग अपने को “देश-भक्त” कहते
हैं और फिर कहते हैं कि गोडसे महान था, उसके नाम की सड़क चाहते हैं,उसको
पूजते हैं. इस मुल्क की बदनसीबी ही है कि नाथूराम गोडसे को पूजने वाले
यहाँ ख़ुद को देश भक्त मानते हैं?
अक्सर इस तरह के लोग “वन्दे-मातरम्” को लाठियों के बल पे दूसरों से गवाना
चाहते हैं, मैं इन लोगों से पूछना चाहता हूँ कि “वन्दे मातरम्” गाना ही
अगर देश भक्ति है तो फिर जब “वन्दे-मातरम्” गीत नहीं लिखा गया था तब लोग
कैसे भारतीय कहलाते थे. इनकी देश भक्ति का सर्टिफिकेट ये गाना 1882 में
लिखा गया है. गोया 1882 से पहले की पैदाइश के लोग तो देशभक्त हो ही नहीं
सकते.
ये वो लोग हैं जो हमारे अज़ीज़ पहले वज़ीर-ए-आज़म जवाहर लाल नेहरु की बुराई
इसलिए नहीं करते क्यूंकि वो बुरे वज़ीर-ए-आज़म थे बल्कि इसलिए करते हैं
क्यूंकि वो मुसलमान थे, चौंकिए मत इन लोगों ने ऐसा ही कुछ प्रोपगंडा आम
पब्लिक में फैलाने की कोशिश की है, हालांकि मेरा सवाल ये भी है कि अगर वो
मुसलमान ही होते तो इसमें इतना हंगामा क्यूँ है. वो वज़ीर-ए-आज़म तो अच्छे
ही थे ना!
इनकी देश भक्ति तभी नज़र आती है जब दादरी में अखलाक़ नज़र आता है, मासूम का
खून करना और फिर उसके बल पर डर का माहौल खड़ा करना ही इनकी देश भक्ति है.
संविधान को अपने हिसाब से बदलने की ज़िद लिए ये लोग संविधान की मूल
विचारधारा से इस क़दर दूर हैं कि अगर आमिर ख़ान या शाहरुख़ ख़ान कोई बात कह
दें तो उन्हें पाकिस्तान जाने की हिदायत दे देते हैं, ये वो देशभक्त हैं
जो कलबुर्गी के क़ातिलों की हिमायत करते हैं.
कौन हैं ये लोग और इनका मक़सद क्या है, ये मुझे,आपको, हर मुसलमान को, हर
हिन्दू को, हर इसाई को, हर सिख को समझना है कि ये लोग जो ख़ुद को “देश
भक्त” कहते हैं ये असल में मुल्क के दुश्मन हैं, ये फ़साद चाहते हैं,
हिन्दू मुस्लमान को बांटना चाहते हैं. ये देश द्रोही हैं.

By Arghwan Rabbhi
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