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गोधरा फ़सादाद: ख़ुरशीद अहमद ने 700 मुस्लमानों को बचाया था

गुजरात में 2002 के दौरान माबाद गोधरा वाक़िया फूट पड़ने वाले फ़िर्कावाराना फ़सादाद में नरोडा के एस आर पी एफ़ कमांडैंट ख़ुरशीद अहमद के रोल की तहक़ीक़ात करनेवाली ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम( एस आई टी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ख़ुरशीद अहमद ने

गुजरात में 2002 के दौरान माबाद गोधरा वाक़िया फूट पड़ने वाले फ़िर्कावाराना फ़सादाद में नरोडा के एस आर पी एफ़ कमांडैंट ख़ुरशीद अहमद के रोल की तहक़ीक़ात करनेवाली ख़ुसूसी तहक़ीक़ाती टीम( एस आई टी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ख़ुरशीद अहमद ने फ़ौजी बैरेक़्स में तक़रीबन 700 मुस्लमानों को पनाह दी थी।

हालाँकि ये इल्ज़ाम आइद किया जा रहा था कि मज़कूरा कमांडैंट ख़ुरशीद ने हमलावर हिंदुओं के हुजूम से बच कर भागने की कोशिश में मसरूफ़ मुस्लमानों को एस आर पी एफ़ बैरेक़्स में पनाह लेने की इजाज़त नहीं दी थी। एस आई टी रिपोर्ट ने ख़ुरशीद अहमद के एक ब्यान के हवाले से कहा है कि उन्हों ने बैरेक़्स में पहले ही से पनाह लेने वाले मुस्लमानों, वहां मौजूद एस आर पी एफ़ अमले के अरकान-ए-ख़ानदान और ख़ुद एस आर पी एफ़ के अस्लाह की हिफ़ाज़त को मल्हूज़ रखते हुए दीगर मुस्लमानों को वहां पनाह देने की इजाज़त नहीं दी थी क्यों कि इस सूरत में हिन्दू हमलावर मज़ीद ब्रहम होकर एस आर पी एफ़ बैरेक़्स पर ही हमला कर सकते थे।

एस आई टी तहक़ीक़ात ने इन्किशाफ़ किया कि ख़ुरशीद अहमद ने दरहक़ीक़त पहले ही 700 से 600 मुस्लमानों को इस वक़्त फ़ौरी तौर पर पनाह दी थी जब नरोडा पाटिया में हिंदुओं के हुजूम ने मुस्लमानों पर हमला कर दिया था।तहक़ीक़ात से पता चला है कि मुक़ामी अफ़राद की कसीर तादाद एस आर पी एफ़ के अहाता में दाख़िल होना चाहती थी और अक्सर लोग हमलों के अंदेशों के तहत वहां पनाह के तलबगार थे।

लेकिन पहले ही से पनाह गज़ीन मुस्लमानों की हिफाज़त के लिए एस आर पी एफ़ के जवानों को बाब अलद अखिला पर तैनात कर दिया था ताकि हिन्दू फ़सादीयों को इस अहाता में दाख़िल होने से रोका जा सके।इस तरह हिन्दू हमलावरों के साथ चंद मुस्लमानों को भी अंदर दाख़िल होने से रोक दिया गया क्योंकि अगर इन मुस्लमानों को अंदर आने की इजाज़त दी जाती तो उन के साथ हिन्दू
हमलावर भी दाख़िल हो सकते थे और इससे वहां पहले ही से मौजूद छः सौ से सात सौ मुस्लमानों के इलावा एस आर पी एफ़ मुलाज़मीन के अरकान ख़ानदान की जान को भी ख़तरा लाहक़ हो सकता था।

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