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गोरखपुर: एक ‘एनकाउंटर’ पर पुलिस ने खर्च कर दिए 10 करोड़ रुपए

image25 साल की उम्र मरने की उम्र नहीं होती। लेकिन इस लड़के ने इस उम्र तक पहुंचते-पहुंचते इतने गुनाह कर डाले की पुलिस हर कीमत पर इससे छुटकारा पाने के लिए दृढ़ संकल्प हो गई थी। पर गोरखपुर के इस लड़के से छुटकारा पाना पुलिस के लिए इतना भी आसान नहीं था।

4 महीने की मशक्कत के बाद जब यूपी एसटीएफ ने आखिरकार इस लड़के का एंकाउंटर किया तब तक वह 10 करोड़ रूपए खर्च कर चुकी थी। इसकी तलाश में पुलिस को 1 लाख किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा करनी पड़ी थी। यह लड़का था श्रीप्रकाश शुक्ल, 90 के दशक का वह माफिया जो उत्तर-प्रदेश, बिहार और दिल्ली मे खौफ का दूसरा नाम बन चुका था।
22 सितंबर 1998 को श्रीप्रकाश शुक्ला को गाजियाबाद के एक अपार्टमेंट में पुलिस ने मार गिराया। वह अपने गर्लफ्रेंड से मिलने आया हुआ था। यह एनाकाउंटर यूपी एसटीएफ की एक स्पेशल टीम ने 4 महीने की कड़ी मशक्कत के बाद अंजाम दे पाई थी। इस टीम को अप्रेल 1998 में यूपी के 43 माफियाओं को मारने के लिए गठित किया गया था।

2005 में आई फिल्म ‘सहर’ श्रीप्रकाश शुक्ला के ऊपर ही आधारित थी। इस फिल्म में सुशांत झा ने श्रीप्रकाश शुक्ला का रोल निभाया था। गोरखपुर के ममखोर गांव में जन्मा श्रीप्रकाश एक पहलवान हुआ करता था। 1993 में श्रीप्रकाश ने एक व्यक्ति को, जिसका नाम राकेश तिवारी था, इसलिए मार दिया क्योंकि उसने उसकी बहन को देखकर उसने सिटी मारी था।
यह श्रीप्रकाश शुक्ल का यहा पहला मर्डर था। और इसके बाद इसके बाद 20 साल के इस लड़के ने हत्याओं का वह सिलसिला शुरू किया कि पुलिस विभाग, राजनीतिक गलियारे हर जगह उसके नाम की तूती बोलने लगी। श्रीप्रकाश शुक्ला का खौफ अपने चरम पर तब पहुंचा जब यह दावा किया गया कि उसने उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मारने के लिए 60 लाख की सुपारी ली है। यह दावा करने वाला कोई और नहीं बल्कि वर्तमान मे उन्नाव से भाजपा सांसद साक्षी महाराज थे। तब वे फरुखाबाद से सांसद थे।
अपने जीवन की पहली हत्या करने के बाद श्रीप्रकाश बैंकॉक भाग गया था। 1997 में उसने विरेंद्र शाही की हत्या की जो कि एक माफिया और नेता था। ऐसा माना जा रहा था कि शुक्ला अब हरी शंकर प्रसाद तिवारी को अगला निशाना बनाएगा जो कि चिल्लुपुर विधानसभा सीट पर विरेंद्र शाही के खिलाफ खड़े थे। दरअसल शुक्ला की भी नजर इस विधानसभा सीट पर थी।
26 मई 1998 को शुक्ला के गैंग ने लखनऊ से एक व्यापारी के बेटे कुणाल रस्तोगी का अपहरण कर लिया। जब उसके पिता ने बेटे को बटाने की कोशिश की तो उसके पिताक कि गोली मारकर हत्या कर दी। माना जाता है की कुणाल को छोड़ने के लिए गैंग ने 5 करोड़ रुपए की फिरौती ली
जून 1998 में बिहार के एक मंत्री ब्रिज बिहारी प्रसाद को शुक्ला ने तब मारा जब वह पटना के एक अस्पताल में अपना इलाज करवा रहे थे।
श्रीप्रकाश शुक्ल पर बिहार के मोतिहारी से विधायक अजित सरकार के कत्ल का भी इल्जाम है। 8 और 15 सितंबर 1998 को उस समय के चर्चित क्राइम शो ‘इंडियास मोस्ट वांटेड’ पर श्रीप्रकाश पर एपिसोड प्रसारित किया गया। इसके बाद इस शो के होस्ट सुहैब इल्यासी ने दावा किया कि उसे शुक्ला से जान के मारने की धमकी मिली है।

बताया जाता है कि शुक्ला पुलिस के हत्थे अपने मोबाइल फोन के कारण चढ़ पाया। वह अपने सिम कार्ड बदलता रहता था लेकिन उसने एक हफ्ते के लिए एक नंबर इस्तेमाल अपने अन्य नंबरो की तुलना में अधिक किया था।
शुक्ला के एंकाउंटर के बाद पुलिस को मिले उसके फोन और डायरी से पता चला था कि उसके कनेक्शन कल्याण सिंह सरकार के सदस्यों के सहित कई अन्य नेताओं, आईपीएस ऑफिसरों और आईएएस ऑफिसरों से थे। इनमे से कई उसे सूचनाएं दिया करते थे, कई नेताओं ने शुक्ला को शरण भी दी थी।
फतेहपुर के बिंदकी तहसील के गांव कौंह में परशुराम मंदिर परिसर में अब श्रीप्रकाश शुक्ला की मुर्ति लगाई जा रही है। इससे पहले डाकू ददुआ और निर्भय गुर्जर की भी मूर्ति लगाए जाने की खबर आई थी। माना जा रहा है कि इन अपराधियों की मंदिरों में मूर्तियां लगाकर उनके जाति के वोटों को 2017 के चुनाव में कैश करने की कोशिश की जाएगी।

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