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गोरखपुर टेरर फंडिंग का मास्टर माइंड रमेश शाह पुणे से गिरफ्तार

गोरखपुर टेरर फंडिंग मामले का  मास्टर माइंड रमेश शाह को यूपी एटीएस ने  पुणे से गिरफ्तार किया है। उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है। डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने गुरुवार को बताया कि मार्च में यूपी एटीएस ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों से छह लोगों को टेरर फंडिंग में गिरफ्तार किया था। इसी मामले में मास्टर माइंड के रूप में रमेश शाह का नाम सामने आया था। वह तभी से फरार चल रहा था।

रमेश पर आरोप है कि वह सीधे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर से जुड़ा था और उसके इशारे पर पैसे मंगवाकर कई लोगों के खातों में जमा कराता था। पैसे की पूरी चेन बनाने में रमेश शाह अहम कड़ी बताया जा रहा है। हवाला कारोबारियों से रमेश की घनिष्ठता भी सामने आई है। इस मामले की जांच एनआईए भी कर रही है। वह बिहार के गोपालगंज का रहने वाला है।

डीजीपी ने दावा किया कि रमेश के ही निर्देशों पर मध्य-पूर्व के देशों, जम्मू-कश्मीर, केरल और पूर्वोत्तर के कई राज्यों से लॉटरी के नाम पर ठगी के जरिये एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा का धन आया। भोले- भाले लोगों को चंद रुपये का लालच देकर उनके खातों में पैसे मंगवाए गए। पैसे आने के बाद खाता धारकों का हिस्सा छोड़कर बाकी पैसे निकाल लिए जाते थे। फिर इसे रमेश द्वारा बताए गए व्यक्तियों को बांटा जाता था। मार्च में एटीएस की कार्रवाई के बाद से ही रमेश फरार चल रहा था।

एटीएस का दावा है कि रमेश इस तरह प्राप्त धन का इस्तेमाल गोरखपुर में अपने व्यवसाय में करता था। डीजीपी ने बताया कि शातिर रमेश न सिर्फ कंप्यूटर का अच्छा जानकार है बल्कि कूटरचित प्रपत्र तैयार करने में भी माहिर है। हवाला कारोबारी और विदेशी हैंडलर को कब-कब पैसे दिए जाते थे, इसके बारे में सिर्फ उसे ही जानकारी है।

पाक हैंडलर और टेरर फंडिंग का मास्टरमाइंड रमेश भारतीय जांच एजेंसियों को इंटरनेट कॉल के माध्यम से चकमा देते थे। बैंक अकाउंट में पैसा भेजने की सूचना रमेश को इंटरनेट कॉल से मिलती थी ताकि एजेंसियों को भनक न लग सके।

एटीएस ने यह भी खुलासा किया है कि लॉटरी के नाम पर पाकिस्तान में बैठकर जालसाज भारत में लोगों से ठगी करते थे। कहीं फर्जी वेबसाइट से तो कहीं लुभावने ऑफर देकर ठगी की जाती थी। इसके लिए भारतीय खातों में पैसे जमा कराए जाते थे। पैसे आने के बाद इसकी सूचना इंटरनेट कॉल के जरिये रमेश को दी जाती थी और रमेश पैसे निकाल कर हैंडलर द्वारा बताए गए लोगों तक पहुंचवा देता था। अपर पुलिस अधीक्षक एटीएस दिनेश यादव ने बताया कि रमेश शाह को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है। उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी।

24 मार्च को एटीएस ने किया था खुलासा
एटीएस ने गोरखपुर और प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में कार्रवाई करते हुए 24 मार्च 2018 को छह लोगों को पकड़ा था। इसमें मुकेश प्रसाद, निखिल राय, अंकुर राय, दयानंद यादव, नसीम अहमद और नईम अरशद शामिल थे। उसी समय खुलासा हुआ था कि यह नेटवर्क खाड़ी देशों के अलावा पाकिस्तान और नेपाल से काम कर रहा है।

क्या यह पैसा कश्मीर में सेना पर पत्थर फेंकने वालों को दिया जाता था? इस सवाल पर डीजीपी ने कहा, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए कहा कि पश्चिमी उप्र के कुछ युवक कश्मीर के पुलवामा में नौकरी के लिए गए थे। वहां उन्हें सिलाई के काम के लिए 20 हजार रुपये दिए गए। साथ ही पार्ट टाइम काम के तौर पर पत्थरबाजी के लिए कहा जाता था। पुलवामा से लौटे युवकों ने यह खुलासा किया है। उधर, आईजी एटीएस असीम अरुण ने रमेश शाह को गिरफ्तार करने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की है। इस टीम में उपाधीक्षक मनीष सोनकर, उप निरीक्षक खादिम सज्जाद, आरक्षी रामजस व संजय सिंह शामिल थे।

काली कमाई से खड़ा किया साम्राज्य
रमेश ने काली कमाई से ही साम्राज्य खड़ा किया है। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बाद भी उसने गोरखपुर में पॉश इलाके असुरन चुंगी के पास सत्यम शॉपिंग मार्ट खोला। यह मार्ट अगस्त 2017 में खुला था। अच्छा व्यापार चल रहा था। रमेश का संपर्क शहर के तमाम प्रतिष्ठित लोगों से था।

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