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गोलकुंडा की खान से निकला हीरा का आज हो रहा नीलाम

नई दिल्‍ली : 16वीं शताब्दी में गोलकुंडा की खान से एक बेहद खूबसूरत गुलाबी हीरा निकाला गया था। इसकी सुंदरता को देखते हुए इसको ले ग्रांड माजारिन का नाम दिया गया था। 19.07 कैरेट के इस हल्‍के गुलाबी रंग के हीरे की चमक एशिया से लेकर यूरोप तक दिखाई दी। इसकी खासियत थी कि यह हीरा नेपोलियन बोनापार्ट समेत फ्रांस के तमाम राजाओं के ताज की शान बना। अब यही हीरा नीलाम हो रहा है। आज यानि 14 नवंबर को इस हीरे की नीलामी स्विट्जरलैंड के शहर जिनेवा के क्रिस्‍टीज ऑक्‍शन हाउस में होने वाली है। हल्‍के गुलाबी रंग के इस हीरे ने फ्रांस की सत्‍ता में आए उतार-चढ़ाव को देखा है। यह पहला मौका नहीं है कि जब गोलकुंडा की खान से निकले हीरे की नीलामी किस्‍टीज में हो रही हो। इससे पहले 2012 में गोलकुंडा खान से निकले एक हीरे की नीलामी लगभग दो करोड़ दस लाख डॉलर यानी लगभग 115 करोड़ रूपये में हुई थी।

ले ग्रांड माजारिन को 1661 में फ्रांस के राजा लुई चौदह को भेंट किया गया। इसके बाद फ्रांस का जो भी राजा बना उसने इस हीरे वाले ताज को अपने सिर पर पहना। नीलामी घर क्रिस्टीज यूरोप और एशिया के चैयरमैने फ्रांको कुरी के मुताबिक यह हीरा सुंदरता की चिरकालीन निशानी है, जिसने फ्रांस के सात राजाओं और रानियों के शाही खजाने की शोभा बढ़ाई। इससे भी बड़ी बात यह है कि यह 350 साल तक यूरोपीय इतिहास का गवाह है। यह हीरा अपने आप में एक क्लास है।

गोलकुंडा की खान से कई बेहद खूबसूरत हीरे निकाले गए जो दुनियाभर में कई राजा और रानियों के मुकुट का हिस्‍सा बने। इसमें कोहिनूर जो कि ब्रिटेन की महारानी के मुकुट में जड़ा गया और रिजेंट डायमंड भी शामिल है। 1792 में यह हीरा चोरी हो गया था लेकिन बाद में इसको तलाश लिया गया।

फ्रांस की क्रांति के बाद यह हीरा नेपोलियन प्रथम और नेपोलियन तृतीय के राजमुकुट का हिस्सा बना। 1870 में नेपोलियन तृतीय के पतन के बाद 1887 में यह हीरा पहली बार नीलाम हुआ था। अब 130 साल बाद यह फिर से नीलाम होने के लिए बाजार में मौजूद है। हालांकि इस हीरे के खरीददार क्रिस्टीज का नाम तो नहीं बताया है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि यह खूबसूरत हीरा 60 से 90 लाख डॉलर में बिकने वाला है। हीरे की नीलामी 14 नवंबर को जिनेवा में होगी।

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