गौकशी और गौतस्करी के आरोप में एनएसए लगाने के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदारः पाॅपुलर फ्रंट

गौकशी और गौतस्करी के आरोप में एनएसए लगाने के लिए कांग्रेस ज़िम्मेदारः पाॅपुलर फ्रंट

पाॅपुलर फ्रंट आफ इंडिया की केंद्रीय सचिवालय की बैठक में इस बात पर सख्त बेचैनी और नाराज़गी जताई गई कि मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा गोकशी और गौतस्करी के आरोप में कुछ मुसलमानों के खिलाफ राष्ट्री सुरक्षा एक्ट (एनएसए) जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल किया गया।

गाय की राजनीति संघ परिवार का हथियार रहा है, जिसे इस्तेमाल करके वे हिंदू भावनाओं को अपनी ओर करने की कोशिश करते हैं। गाय की राजनीति ने ही गौरक्षा जैसी एक भयावह स्थिति को बढ़ावा दिया।

पिछले कुछ सालों में, संघ परिवार से जुड़े गौरक्षकों के हाथों दर्जनों निर्दोष मुसलमानों को जान से हाथ धोना पड़ा। देश के हालात ऐसे बना दिये गए हैं कि बीफ रखने या उसे ले जाने का आरोप ही चाहे वह सही हो या गलत, इस बात के लिए काफी है कि किसी व्यक्ति को सरेआम बेदर्दी से पीट-पीट कर मार दिया जाए। मध्य प्रदेश में ऐसी और भी घटनाएं हो चुकी हैं। कांग्रेस की जीत के बाद राज्य के अल्पसंख्यक समुदायों ने कुछ चैन की सांस ली कि अब कांग्रेस अराजकता को खत्म करेगी और अपराधी गौरक्षकों को कानून के कटघरे में खड़ा करेगी। लेकिन उनकी बेचैनी तब और बढ़ गई जब उन्होंने मामले को बिल्कुल विपरीत पाया। राज्य सरकार गौरक्षकों के ही एजेंडे को पूरा करती नज़र आ रही है। गाय काटने और उसे एक जगह से दूसरे जगह ले जाने को राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले से जोड़कर कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने यह साबित कर दिया है कि वह आरएसएस के राष्ट्रवाद की सोच से कितना करीबी ताल्लुक रखती है।

भले ही कुछ कांग्रेस नेताओं ने कानून के इस दुरूपयोग पर अपनी असहमति जताई है, लेकिन पार्टी अपने मुख्यमंत्री के कदम को ठीक करने में असफल रही है। कंद्रीय सचिवालय की बैठक ने कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व को याद दिलाया कि मध्य प्रदेश सरकार की इस प्रकार की गलतियों को न रोकने के कारण, मुस्लिम व अन्य अल्पसंख्य समुदाय आम चुनाव के मौके पर पार्टी से दूर होते जा रहे हैं।

एक अन्य प्रस्ताव में पाॅपुलर फ्रंट की केंद्रीय सचिवालय की बैठक ने मुज़फ्फर नगर दंगों के मामलों में सत्ता के गलत इस्तेमाल की निंदा की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुज़फ्फर नगर दंगों से जुड़े 131 मामलों को वापस लेने की पूरी तैयारी कर ली है, जिसमें दर्जनों निर्दोष विशेषकर मुसलमानों की बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी, महिलाओं का रेप किया गया और घरों को आग के हवाले कर दिया गया। जिन मामलों को वापस लेने की तैयारी है, उनमें हत्या सहित बीजेपी के स्थानीय नेताओं के खिलाफ गंभीर मामले शामिल हैं। ज़ाहिर सी बात है कि मुख्यमंत्री हत्या, रेप और आगज़नी के दोषी अपनी पार्टी के लोगों और समर्थकों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। यह खुला भेदभाव ही तो है कि एक तरफ अपराधियों को सज़ा दी जाए और दूसरी ओर उनके धर्म और राजनीति को देखते हुए उन्हें आज़ाद कर दिया जाए।

बैठक ने यह उम्मीद जताई कि न्यायपालिका यूपी सरकार में लाॅ एण्ड आॅर्डर के इस खुले उल्लंघन को ज़रूर रोकेगी।

चेयरमैन ई. अबूबकर ने बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें एम. मुहम्मद अली जिन्ना, ओ.एम.ए. सलाम, के.एम. शरीफ, अब्दुल वाहिद सेठ और ई.एम. अब्दुर्रहमान शामिल रहे।

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