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गौरक्षा पर झूठ बोल रहे हैं मोहन भागवत

नागपुर: देश के अलग-अलग हिस्सों से गौरक्षकों के आतंक की ख़बरें हर दिन सुर्खियां बन रही हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का दावा है कि इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। भगवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग हैं, जो गौरक्षा के प्रति समर्पित हैं। यह राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि गौरक्षक कानून के तहत काम करते हैं। इस साल गौरक्षा के नाम पर कई घटनाएं हुईं जिसको मोहन भागवत नकार गए। 11 जुलाई को गुजरात के ऊना में मरी गाय की खाल उतारने को लेकर दलितों का उत्पीड़न हुआ था। उनके हाथ बांध कर लाइन से खड़ा कर पीटा गया। 7 जुलाई को मध्यप्रदेश के मंदसौर में दो मुस्लिम महिलाओं के पास मांस होने के शक पर रेलवे स्टेशन पर पिटा गया। 22 जून को उत्तरप्रदेश के मथुरा में एक ट्रक में आग लगा दी गई। 10 जून को गुड़गांव में गौरक्षा दल के सदस्यों ने कथित बीफ स्मगलर्स को जबरदस्ती गाय का गोबर और मूत्र पिलाया। 3 जून को राजस्थान के प्रतापगढ़ में बजरंग दल और गौरक्षा दल के करीब 150 लोगों ने गाय ट्रांसपोर्ट के नाम पर तीन लोगों की बहुत पिटाई की। 27 मार्च को हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक व्यक्ति को हत्या कर दिया गया, जब वह अपने दो बैलों को लेकर खेतों पर जा रहा था। इतनी सारी घटनाओं के वावजूद भागवत बहुत आसानी से गौरक्षकों का बचाव कर गए। इतना ही नहीं गौरक्षकों को इन्होंने समाज का भला नागरिक बता दिया।

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