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घर और अमली ज़िंदगी में भी उर्दू के चलन को आम करें

उर्दू कोनसिल हिन्द के ज़ेरे एहतेमाम कतर से तशरीफ लाये शायर जनाब इफतिखार रागीब के इस्तकबाल और एजाज में एक महफ़ील एतेराफ मारुफ़ शायर बदिउज्जमा सहर के दौलत कदे पर मुनक्कीद की गयी। जिसकी सदारत पर प्रोफेससर अलिमुल्लाह हाली ने की। जनाब ख

उर्दू कोनसिल हिन्द के ज़ेरे एहतेमाम कतर से तशरीफ लाये शायर जनाब इफतिखार रागीब के इस्तकबाल और एजाज में एक महफ़ील एतेराफ मारुफ़ शायर बदिउज्जमा सहर के दौलत कदे पर मुनक्कीद की गयी। जिसकी सदारत पर प्रोफेससर अलिमुल्लाह हाली ने की। जनाब खुर्शीद अकबर और मुंबई से तशरीफ लाये शायर शकील आज़मी मेहमान एजाजी की हैसियत से शरीक महफिल थे।

इस मौक़े पर इफतिखार रागीब की नयी शायरी तसनीफ़ “गजल दरख्त” का उजरा भी अमल में आया। उर्दू कोनसिल हिन्द ने इफतिखार रागीब की शायरी खिदमात का एतेराफ़ करते हुये उन्हें एक यादगारिया और एक सनद एतेराफ़ से जनाब शफ़ी मुशहरी के हाथों नवाजा। कोनसिल की जानिब से प्रोफेससर अलिमुल्लाह हाली ने उनकी शाल पोशी करके उनकी इज्ज़त अफजाई की। कोनसिल के नाज़िम आला डॉक्टर असलम निजामत करते हुये मेहमानों का इस्तकबाल किया और मेहमान खुसुसि जनाब इफतिखार रागीब का मोखतसिर तारीफ भी पेश किया

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