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चंद दिनों की तरावीह पढ़ कर छुट्टी कर लेना सही नहीं

जमशेदपुर 13 जुलाई : रमजान के पहले जुमा की नमाज के पहले अपने खिताब (तकरीर) में धातकीडीह मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना मुफ्ती अमीरुल हसन ने कहा कि अल्लाह ने रोजा को इसलिए फर्ज (मज़हबी तौर से लाज़मी) किया, ताकि बंदा अपने नफ्स को शरियत के मु

जमशेदपुर 13 जुलाई : रमजान के पहले जुमा की नमाज के पहले अपने खिताब (तकरीर) में धातकीडीह मस्जिद के इमाम व खतीब मौलाना मुफ्ती अमीरुल हसन ने कहा कि अल्लाह ने रोजा को इसलिए फर्ज (मज़हबी तौर से लाज़मी) किया, ताकि बंदा अपने नफ्स को शरियत के मुताबिक अमल करने वाला बनाए। उन्होंने रोजेदारों को शरियत की बातें समझाते हुए कहा कि रोजा में जरूरी है कि गाली-गलौज न करें। लड़ाई-झगड़े, झूठ, गीबत से बचें, क्योंकि इससे रोजे का सवाब कम हो जाता है। इसी तरीके से रोजेदार अपनी जबान, आंखों और कानों की हिफाजत करें। यानी किसी को बुरा ना बोले, ना बुरा सुनें और किसी पर बुरी नजर न डालें।

मुफ्ती अमीरुल हसन ने यह भी कहा कि इफ्तार के समय दुआ का एहतेमाम करें। नमाज और रमजान में पढ़ी जाने वाली खुसूसी तरावीह की नमाज का एहतेमाम करें।
मौलाना मुफ्ती अमीरुल हसन ने कहा है कि कुछ लोग चंद दिनों की तरावीह की नमाज पढ़कर छुट्टी कर लेते हैं। यह सही नहीं है। रमजान में तरावीह की नमाज में कुरआन-ए-शरीफ का सुनना एक सुन्नत है और पूरे महीने तरावीह की नमाज पढऩा दूसरी सुन्नत है।

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