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चांद पर मिली 50 किलोमीटर लंबी गुफा जहां चंद्रमा पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट भी रह सकते हैं

तोक्यो : जापान के वैज्ञानिकों को चांद पर एक बहुत बड़ी गुफा का पता चला है।  जिसकी लंबाई 50 किलोमीटर और चौड़ाई 100 मीटर है। वैज्ञानिकों ने गुरुवार को बताया कि इस गुफा में चंद्रमा पर जाने वाले एस्ट्रोनॉट रह सकते हैं। इससे वे खतरनाक विकिरण और तापमान में बदलाव से बच सकते हैं। जापान के एईएईएनई लूनर ऑर्बिटर से मिले आंकड़ों के अनुसार चांद पर मौजूद यह गुफा 3.5 अरब साल पहले भूगर्भ के अंदर हुई हलचल की वजह से बनी होगी।  वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह गुफा भूगर्भ से निकले लावे की वजह से तैयार हुई होगी। जापानी वैज्ञानिकों ने ये आंकड़े और नतीजे अमेरिकी पत्रिका जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित कराए हैं।

जापानी वैज्ञानिक जुनिची हारुयामा ने गुरुवार को कहा, ‘हमें अभी तक ऐसी चीज के बारे में पता था और माना जाता था कि यह लावा ट्यूब हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी की पुष्टि पहले नहीं हुई थी।’ जमीन के अंदर मौजूद यह गुफा चंद्रमा के मारियस हिल्स नामक जगह के पास है। जापानी वैज्ञानिक ने कहा कि इस गुफा में रह कर अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा प्रवास के दौरान विकिरण और तापमान में होने वाले तेज बदलावों के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं।

जापान ने इसी साल जून में साल 2030 तक चंद्रमा पर अंतरिक्ष मिशन भेजने की घोषणा की है। भारत और चीन भी अपने-अपने अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं। चंद्रमा पर सबसे पहले 20 जुलाई 1969 को मनुष्य ने कदम रखा था। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के दो एस्ट्रोनॉट नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रीन अंतरिक्ष विमान अपोलो 11 में सवार होकर चांद पर पहुंचे थे।

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