Tuesday , December 12 2017

चार लाख से ज़ाइद महसूर शामियों को इमदाद की फ़राहमी नामुमकिन

अक़वामे मुत्तहिदा ने ख़बरदार करते हुए कहा है कि चार लाख बाईस हज़ार शामी बाशिंदे जंग ज़दा इलाक़ों में महसूर हो कर रह गए हैं और इन्सानी बुनियादों पर उन तक किसी किस्म की भी इमदाद पहुंचाना नामुमकिन हो गया है।

अक़वामे मुत्तहिदा ने एक मर्तबा फिर ख़बरदार करते हुए कहा है कि हर गुज़रते हुए दिन के साथ ख़ाना जंगी के शिकार मुल्क शाम की सूरते हाल मज़ीद बिगड़ती जा रही है। अक़वामे मुत्तहिदा के इन्सानी उमूर के सरब्राह स्टीफ़न ओ ब्राइन ने कहा कि जंग ज़दा इलाक़ों में महसूर अफ़राद की हालत पहले से अबतर होती जा रही है।

उनका कहना था कि इस वक़्त जंग ज़दा इलाक़ों में तक़रीबान छयालीस लाख अफ़राद मौजूद हैं और उन तक भी इन्सानी इमदाद पहुंचाना मुश्किल हो चुका है। उनका कहना था कि गुज़िश्ता महीनों के दौरान उनमें से भी सिर्फ बारह फ़ीसद तक इमदाद पहुंचाई गई लेकिन चार लाख से ज़ाइद शामी बाशिंदे ऐसे हैं कि जो महसूर हो चुके हैं और किसी भी तरीक़े से उन तक इमदाद पहुंचाना फ़िलहाल नामुमकिन है।

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