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चीनी मईशत भी इन्हितात और सुस्त रवी से मुतास्सिर

बीजिंग 19 जनवरी (पी टी आई) चीनी मईशत की शरह नमू 2012 में सिर्फ़ 7.8फ़ीसद रही है जो सालाना मआशी तरक़्क़ी के एतबार से गुज़िश्ता 13 साल के दौरान ये कमतरीन शरह तरक़्क़ी भी है जिस के कई बैरूनी अस्बाब और दाख़िली अवामिल ज़िम्मेदार हैं।

बीजिंग 19 जनवरी (पी टी आई) चीनी मईशत की शरह नमू 2012 में सिर्फ़ 7.8फ़ीसद रही है जो सालाना मआशी तरक़्क़ी के एतबार से गुज़िश्ता 13 साल के दौरान ये कमतरीन शरह तरक़्क़ी भी है जिस के कई बैरूनी अस्बाब और दाख़िली अवामिल ज़िम्मेदार हैं।

चीन के क़ौमी ब्यूरो बराए आदाद की तरफ़ से जारी करदा तफ़सीलात के मुताबिक़ रवां साल की शरह तरक़्क़ी गुज़िश्ता 13 बरसों के दौरान होने वाली शरह नमू के एतबार से सब से कम है। 2011 के दौरान शरह नमू 9.3 फ़ीसद रही जबकि 2010 में ये 10.4 फ़ीसद थी।

रवां साल के चौथे सह माही में तरक़्क़ी की शरह सिर्फ़ 7.9 फ़ीसद रिकार्ड की गई। इस तरह चीनी शरह नमू में लगातार सातवीं सह माही में भी इन्हितात का रुजहान पाया गया। तजज़िया निगारों का कहना है कि हुकूमत चीन की तरफ़ से मईशत को बदस्तूर फ़आल और मुतहर्रिक रखने के लिए हुकूमत की तरफ़ से बचा लिया।

सरकारी ख़बररसां इदारा झुन्नावा ने ख़बर दी है कि हुकूमत ने 2012 के अवाइल से मईशत को मुस्तहकम बनाने के लिए मुआविन इक़दामात किए थे जिस के बेहतर नताइज बरामद हुए हैं।

चीनी ममलिकती कौंसल में तरक़्क़ीयाती तहक़ीक़ी मर्कज़ से वाबस्ता एक तजज़िया निगार झ़यानग लेकिन ने कहा कि में समझता हूँ कि मआशी तरक़्क़ी मुस्तहकम होगई है लेकिन इस का बहुत जल्द पहले की तरह फ़आल और मुतहर्रिक होना हनूज़ ग़ैर वाज़ेह है।

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