चीन की जेलों में बंद राजनीतिक, धार्मिक कैदियों के साथ उइगर मुस्लिमों के आर्गन निकाले जा रहे हैं !

चीन की जेलों में बंद राजनीतिक, धार्मिक कैदियों के साथ उइगर मुस्लिमों के आर्गन निकाले जा रहे हैं  !

हो सकता है कि आप स्तब्ध रह जाएं या विश्वास ही नहीं करें लेकिन ये चीन की वो हकीकत है, जिससे आप कांप सकते हैं. हाल ही में एक मानवाधिकार ट्रिब्यूनल ने अपनी एक रिपोर्ट पेश की है, वो दहलाने वाली है. रिपोर्ट कहती है कि चीन अपनी जेलों में बंद राजनीतिक, धार्मिक कैदियों के साथ उइगर मुस्लिमों के आर्गन जबरदस्ती निकल रहा है. इसीलिए चीन की जेलों में संदेहास्पद तरीके से काफी कैदी मर जाते हैं.

रिपोर्ट कहती है कि चीन में ये काम सरकार की छत्रछाया में संगठित ढंग से हो रहा है. बड़े पैमाने पर हो रहा है. दरअसल पिछले दो दशकों में चीन पर ऐसे आरोप लगातार लगे हैं. दुनिया में सबसे ज्यादा आर्गन ट्रांसप्लांट चीन में होते हैं. दूसरे देशों से बड़े पैमाने पर लोग वहां गैरकानूनी आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए जाते हैं.  चीन को कई जगहों पर आर्गन ट्रांसप्लांट का ब्लैक मार्केट भी कहते हैं.

आरोप लगाने वाले कोई और नहीं बल्कि चीन से आए हुए वो लोग हैं, जो फालुन गांग नाम के उस आध्यात्मिक ग्रुप से संबंधित हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में हजारों की संख्या में चीन से पलायन किया है. इस ग्रुप से संबंधित हजारों लोग चीन की जेलों में भी हैं.


साथ ही ऐसे लोग भी हैं जिनके संबंधी चीन में राजनीतिक कैदी हैं. इनके अलावा पिछले दिनों उइगर मुसलमानों ने भी कई मंचों के जरिए उत्पीड़न की दर्दनाक कहानियां पेश की हैं,  ये कहानियां वहां की जेलों में बंद कैदियों के जबरिया आर्गन निकालने की हैं.इन सभी लोगों से जुड़े संगठन कई सालों से चीन की इस करतूत के खिलाफ पूरी दुनिया में आवाज उठा रहे हैं. वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन से लेकर दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठनों और कई देशों की सरकारों के सामने वो गुहार कर चुके हैं. इसी की बिना पर पिछले साल “इंटरनेशनल कोएलेशन टू इंड ट्रांसप्लांट एब्यूज इन चाइना” नाम के संगठन ने मानवाधिकारवादियों, डॉक्टरों और वकीलों को लेकर एक ट्रिब्यूनल बनाया.

ट्रिब्यूनल ने ढेर सारे लोगों से बात की. इनमें वो लोग थे जो चीन से भागकर विदशों में शरण लिए हुए हैं. ट्रिब्यूनल ने सबूत इकट्ठे किए. जेल से रिहा लोगों से बात की.  इन सब बातों के आधार पर रिपोर्ट बनाई.
दिसंबर 2018 में जब रिपोर्ट पेश हुई तो इससे साफ था कि चीन में धडल्ले से क्रूरता से भरा ये अमानवीय अपराध हो रहा है.

ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि उसे चीन सरकार की उस बात पर कतई विश्वास नहीं कि वर्ष 2015 से देश में आर्गन ट्रैफिकिंग रोकी जा चुकी है.

चीन की जेलों में कैदियों के अंग किस तरह निकाले जाते हैं, उससे संबधित एक प्रदर्शनी पिछले दिनों लंदन में लगी, जिसमें बताया गया कि मानव शरीर का कौन कौन से अंग निकालकर उसे किस तरह छोड़ दिया जाता है

फालुन गांग के लोग बन रहे हैं सबसे ज्यादा निशाना
दुनियाभर में इस मामले के खिलाफ सबसे ज्यादा आवाज चीन के उस आध्यात्मिक समूह फालुन गांग ने उठाई है, जिसे चीन में 1999 में प्रतिबंधित कर दिया गया, जिसके हजारों लोग चीन की जेलों में है, उसमें से बहुत कम छूटकर बाहर आ पाए हैं. अब इस संगठन ने अपना मुख्यालय अमेरिका में बना लिया है.

लंदन में जब ये रिपोर्ट पेश की गई तो वहां स्थित चीन के राजदूत ने यही कहा कि ये चीन के खिलाफ दुष्प्रचार है. हालांकि तथ्य ये भी है कि चीन की जेलों में हर साल संदेहास्पद तरीके से काफी कैदी मरते हैं. मौत की कोई वजह नहीं बताई जाती. माना जाता है कि चीन के लेबर कैंप्स और जेलों में कैदियों के अंग निकाले जाने का काम खूब होता है. इसमें सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों और आर्गन बैंक का योगदान रहता है.
पिछले दिनों ब्रिटेन म्युजियम में करीब 200 ऐसे लोगों की तस्वीरें या मृत शरीरों का प्रदर्शन किया, जिनके शरीर के आर्गन चीन में निकाल लिये गए थे.

बड़े पैमाने पर विदेशी आर्गन ट्रांसप्लांट के लिए आते हैं चीन
जेलों में अंगों को जबरदस्ती निकालना गंभीर अपराध है. लेकिन दुनियाभर में धड़ल्ले से ना केवल आर्गन ट्रैफिकिंग होती है बल्कि ब्लैक मार्केट ट्रांसपोर्ट टूरिज्म भी जारी है. जिसमें कई देशों के लोग चोरी चुपके से चीन आते हैं, जहां उन्हें गैरकानूनी तौर पर आर्गन उपलब्ध हो जाते हैं. लेकिन इसके एवज में उन्हें मोटा पैसा देना होता है. रिपोर्ट्स कहती हैं कि अर्से से चीन कामर्शियल आर्गन ट्रैफिकिंग के जरिए मोटा धन बना रहा है, जिसे वहां के मेडिकल और मिलिट्री सेक्टर में लगाया जाता है.

माना जाता है कि चीन में ये सब बहुत सुनियोजित तरीके से होता है. आमतौर पर किडनी, लीवर और हार्ट जैसे आर्गन की पूरी दुनिया में खासी मांग है. इस पूरे मामले पर एक चर्चित डाक्युमेंट्री फिल्म आर्गन हार्वेस्ट भी बनाई गई थी, जिसे कई अवार्ड मिल चुके हैं.

वैसे चीन का कहना है कि उसने इसके रोकथाम के लिए जो कानून बनाया हुआ है वो काफी कड़ा है. चीन का कानून कहता है कि आर्गन का दान जरूरी है, इसके लिए किसी तरह के धन का आदान प्रदान नहीं होना चाहिए.

चीन में आर्गन डोनेशन बढ़ा है
हालांकि इसी महीने में चीन की न्यूज एजेंसी जिन्हुआ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चीन में जब से नया कानून आया है तब से आर्गन डोनेशन हर साल 20 फीसदी तक बढ़ गया है. 2010 के चीन के आंकड़ों के अनुसार, 64 हजार लोगों ने आर्गन दान दिये जबकि करीब तीन लाख लोगों को आर्गन की जरूरत थी. निश्चित तौर पर ये आंकड़ा अब और बढ़ चुका होगा. आपको ये भी बता दें कि चीन का आर्गन बैंक काफी मजबूत है. यहां हमेशा हजारों आर्गन रहते हैं.

साभार- news18

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