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चीन के आगे झुकी मोदी सरकार, उइघुर एक्टिविस्ट को वीज़ा देने से किया इंकार

नई दिल्ली: पिछले लोकसभा चुनावों ने देश को एक ऐसी सरकार दी है जिसने दुनिया भर की सरकारों के तलवे चाट भारत का नाम डुबोने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कभी पाकिस्तान से आईएसआई टीम को भारत बुलाकर तो कभी दुनिया भर में मोदी गो बैक के नारे लगवाकर। मोदी सरकार ने पूरे दुनिया में अपने साथ साथ देश की इज़्ज़त को भी दांव पर लगाया है।

इस सरकार के कारनामों को एक शब्द में बयान करना हो तो वो एक शब्द U-Turn ही होगा। क्यूंकि काले धन से लेकर फड़ी, रेलवे प्राइवेटाइजेशन से लेकर चीन को उसी की भाषा में जवाब देने तक इस देश की मौजूदा निकम्मी सरकार ने जनता को सिर्फ और सिर्फ धोखा ही दिया है।

हाल ही में सरकार ने देश के मोस्ट वांटेड आतंकी मौलाना मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकी करार दिए जाने को लेकर यूएन में अपील की थी, करीबन सभी यू.एन. मेंबर देश भारत की अपील से सहमत थे लेकिन चीन ने इस बात का विरोध कर वीटो पावर का इस्तेमाल किया और मसूद को आतंकी घोषित किये जाने से बचा लिया। अब चूँकि गेंद भारत के पाले में थी। भारत ने भी चीन की तरफ से आतंकी घोषित किये एक उइघुर एक्टिविस्ट दोलकुन इसा को धर्मशाला( हिमाचल प्रदेश) में होने वाली एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए वीसा जारी कर दिया।

भारत के इस कदम का चीन ने कड़ा विरोध किया जिसके बाद भारत ने एक बार फिर U-Turn लेते हुए दोलकुन इसा को वीसा देने से मन कर दिया। मोदी सरकार की इस हरकत को मोदी समर्थक चाहे राजनीति या कूटनीति का नाम दें लेकिन हमारे देश में ऐसी हरकतों को तलवे चाटना ही कहते हैं।

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