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चीन के विगर मुसलमान भी जी रहे हैं डर के माहौल में, जबरन लिए जा रहे हैं डीएनए नमूने

शिनजियांग : शिनजियांग में विगर मुस्लिमों की आबादी 8 लाख है, जो एक तुर्क जातीय जातीय समूह है जो बहुसंख्यक हन चीनी आबादी के साथ बढ़ते तनाव का सामना करते रहे हैं। शिनजियांग प्रांत चीन में होने पर भी इराक़ की राजधानी बगदाद जैसी दिखाई देती है, लेकिन ये है पश्चिमी चीन का शिनजियांग प्रांत, जहाँ रहने वालों पर सुरक्षा बलों की पैनी निगाह है. यहाँ वीगर समुदाय के लोग रहते हैं, जो कि मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं. वीगर असल में मुसलमान हैं. सांस्कृतिक और जनजातीय रूप से वे खुद को मध्य एशियाई देशों के नज़दीकी मानते हैं. वो यहां डर के माहौल में रह रहे हैं. सरकारी जासूसों की निगाह हर पल उन पर पहरा डाले रखती है, उनसे सवाल पूछे जाते हैं तो वो खुलकर इनका जवाब भी नहीं दे पाते हैं.

वहां के शिनजियांग प्रांत में कई लोगों को बिना मुक़दमे के हिरासत में लेने की बात सामने आई हैं. अप्रैल 2017 की शुरुआत में भी शिनजियांग में सरकार ने इस्लामी चरमपंथ के ख़िलाफ़ अभियान के तहत वीगर मुस्लिमों पर नए प्रतिबंध लगाए थे. इनमें ‘असामान्य’ रूप से लंबी दाढ़ी रखने, सार्वजनिक स्थानों पर नक़ाब लगाने और सरकारी टीवी चैनल देखने से मना करने जैसी पाबंदियाँ शामिल थीं. साल 2014 के रमज़ान में मुसलमानों के रोज़े रखने पर रोक लगा दी गई थी.

यहां के लाखों निवासियों से जबरन डीएनए नमूने लिए जा रहे हैं. उनके मोबाइल खंगाले जाते हैं और पता लगाया जाता है कि कहीं वो सांप्रदायिक या भड़काऊ संदेशों का आदान-प्रदान तो नहीं कर रहे हैं और अगर किसी पर चीन से गद्दारी करने का हल्का सा भी शक हुआ तो उन्हें ख़ुफिया जेलों में भेज दिया जाता है.

अब्दुर्रहमान कहते हैं, “सुबह से शाम तक उन्हें बस एक कुर्सी पर बिठाया जाता है. मेरी मां को इस तरह की सज़ा भुगतनी पड़ रही है. मेरी पत्नी का कसूर सिर्फ़ इतना है कि वो वीगर है और इसकी वजह से वो एक कैंप में रहती है, जहाँ उसे ज़मीन पर सोना पड़ता है. मैं ये भी नहीं पता कि वो ज़िंदा हैं या मर चुके हैं. मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकता. मैं चाहता हूं कि चीनी सरकार उन्हें दर्द देने के बजाय उन्हें मार दे. गोलियों के पैसे मैं दूंगा.”

दूसरी ओर, चीन वीगर मुसलमानों पर किसी तरह के जुल्मों से इनकार करती रही है. चीन हाल में दुनिया में हुए चरमपंथी हमलों का हवाला देकर इस्लामिक चरमपंथ को बड़ा ख़तरा बताता है.

बीसवीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में वीगरों ने थोड़े समय के लिए खुद को आज़ाद घोषित कर दिया था. इस इलाके पर कम्युनिस्ट चीन ने 1949 में पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया था. दक्षिण में तिब्बत की तरह ही शिनजियांग भी आधिकारिक रूप से स्वायत्त क्षेत्र है. पिछले दशक के दौरान अधिकांश प्रमुख वीगर नेताओं को जेलों में ठूंस दिया जाता रहा या चरमपंथ के आरोप लगने के बाद वे विदेशों में शरण मांगने लगे. शिनजियांग में चीन के हान समुदाय को बड़े पैमाने पर बसाने की कार्रवाई ने यहां वीगरों को अल्पसंख्यक बना दिया है. बीजिंग पर यह भी आरोप लगा कि इस इलाके में अपने दमन को सही ठहराने के लिए वो वीगर अलगवावादियों के ख़तरे को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है.

चीन की सरकार कहता है कि वीगर चरमपंथी अलग होने के लिए बम हमले, अशांति और तोड़ फोड़ की कार्रवाइयों के मार्फत हिंसक अभियान छेड़े हुए हैं. अमरीका में 9/11 के हमले के बाद चीन ने वीगर अलगाववादियों को अधिकाधिक रूप से अल-क़ायदा का सहयोगी सिद्ध करने की कोशिश की है. चीन कहता रहा है कि उन्होंने अफ़गानिस्तान में प्रशिक्षण हासिल किया है. हालांकि इस दावे के पक्ष में बहुत कम ही सबूत पेश किए जाते रहे. अफ़गानिस्तान पर हमले के दौरान अमरीका सेना ने 20 से ज़्यादा वीगरों को पकड़ा था.

स्थानीय और विदेशी पत्रकारों की गतिविधियों पर सरकार कड़ी निगरानी रखती है और इलाक़े की ख़बरों के बहुत कम ही स्वतंत्र स्रोत हैं. हालांकि, चीन को निशाना बनाकर किए जाने वाले ये अधिकांश हमलों से लगता है कि वीगर अलगाववाद आगे भी और काफ़ी हिंसक ताकत बना रहेगा.

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