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चीन से जंग में शिकस्त के लिए नेहरू कुसूरवार: टिपनिस

नई दिल्ली, २० नवंबर्: हिंदुस्तानी फिजाईयां के साबिक एयर चीफ मार्शल (रिटायर) एवाई टिपनिस ने 1962 में चीन के साथ हुए जंग में शिकस्त के लिए तत्कालीन वज़ीर ए आज़म जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया है। जंग के दौरान एयर फोर्स का इस्तेमाल न

नई दिल्ली, २० नवंबर्: हिंदुस्तानी फिजाईयां के साबिक एयर चीफ मार्शल (रिटायर) एवाई टिपनिस ने 1962 में चीन के साथ हुए जंग में शिकस्त के लिए तत्कालीन वज़ीर ए आज़म जवाहर लाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया है। जंग के दौरान एयर फोर्स का इस्तेमाल नहीं किए जाने को लेकर चल रही बहस के बीच टिपनिस का यह बयान आया है।

‘भारत और चीन : 1962 जंग के पांच दशक बाद’ मौजू पर मुनाकिद एक सेमिनार में टिपनिस ने इल्ज़ाम आइद किया कि नेहरू ने आलमी Global लीडर बनने की अपनी आरज़ू के चलते कौमी सलामती के मुफादात को नजरअंदाज किया था। हाल ही में मौजूदा एयर फोर्स चीफ एयर चीफ मार्शल एन ए के ब्राउन ने कहा था कि अगर एयर फोर्स को जारहाना किरदार निभाने का मौका मिलता तो 1962 में चीन के साथ हुई जंग का नतीज़ा कुछ अलग होता।

टिपनिस ने मंगलको कहा कि हिंदुस्तान की हार में नेहरू का अहम ताऊन ( योगदान) था। 72 साल के टिपनिस 31 दिसंबर 1998 से तीन साल तक एयर फोर्स के सरबराह रहे थे। चीन के साथ जंग से दो साल पहले 1960 में उन्हें फाइटर पायलट के तौर पर एयर फोर्स में शामिल किया गया था। साबिक एयर फोर्स चीफ ने कहा कि उन दिनों वज़ीर ए आज़म नेहरू फौजी सरबराह के साथ स्कूली बच्चों जैसा सुलूक करते थे।

1962 की जंग में एयर फोर्स का इस्तेमाल नहीं किए जाने पर फौजी इतिहासकार और माहिरीन बहस कर रहे हैं और यह अभी तक साफ नहीं हो सका है कि आखिरकार एयर फोर्स का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया। ब्राउन ने कहा था कि एयर फोर्स को जारहाना किरदार करने की इज़ाजत नहीं थी और उसे केवल फौज को ट्रांसपोर्ट में मदद फराहम कराने को कहा गया था। पिछले 50 सालों में इस बार 20 अक्तूबर को पहली बार हिंदुस्तान ने चीन के साथ हुई जंग की सालगिरह मनाई।

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