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चुनाव के बाद मुल्क में तरक़्क़ी नहीं सिक्योरिटी मसला पैदा हो गया:जगदीश चंद्र

हैदराबाद 28 फ़रवरी: ई टीवी उर्दू के न्यूज़ हैड मिस्टर जगदीश चंद्र ने कहा कि 2014 के चुनाव से पहले ये यकीन दिया जा रहा था कि मुल्क में चुनाव के बाद तरक़्क़ी होगी और अवाम ने भी इस यकीन् को बड़ी हद तक क़बूल कर लिया था।चुनाव के बाद हुकूमत तो बदल गई लेकिन किसी तरह की तरक़्क़ी होने की बजा-ए-ख़ुद मुल्क के अवाम के लिए सिक्योरिटी-ओ-सलामती के मसाइल पैदा हो गए हैं।

जगदीश चंद्र ई टीवी उर्दू के 15 साल की तकमील के मौके पर मुनाक़िदा जश्न उर्दू से ख़िताब कर रहे थे। इस तक़रीब में एडीटर सियासत ज़ाहिद अली ख़ां के अलावा डॉ ऐस ए शकूर सय्यदा फ़लक और मीर अय्यूब अली ख़ां को तहनियत भी पेश की गई। चंद्र ने कहा कि मुल्क में शहरीयों के लिए जो सलामती का मसला पैदा हुआ है वो तशवीशनाक बात है। इस पर हुकूमत को हरकत में आने की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि ई टीवी ने हमेशा ही अवाम की राये को हुकूमत तक पहूँचाने का काम किया है और वो आइन्दा भी जारी रहेगा। उर्दू के ताल्लुक़ से उन्होंने कहा कि ये एक एसी ज़बान है जिसमें दूसरों को गरवीदा कर लेने की सलाहीयत है और मुल्क की एक बड़ी तादाद इस ज़बान से वाबस्ता है। इस तबक़ा के जज़बात-ओ-एहसासात को हुकूमत तक पहूँचाने में ई टीवी उर्दू ने अहम रोल अदा किया है।

डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर मुहम्मद महमूद अली ने कहा कि रियासत में उर्दू का मुस्तक़बिल रोशन है क्युंकि चीफ़ मिनिस्टर चन्द्रशेखर राव‌ ख़ुद उर्दू के शैदाई हैं। उन्होंने शहरीयों के लिए सलामती के मसले का तज़किरा किया और कहा कि ये मसाइल मुल्क भर की दूसरी रियासतों में हो सकते हैं तेलंगाना में एसे मसाइल नहीं हैं। यहां सेक्युलर हुकूमत है। यहां जराइम की शरह कम हुई है और तेलंगाना में गंगा जमुनी तहज़ीब है।

इस मौके पर ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर सियासत ने मुबाहिसा में कहा कि नई नसल को उर्दू से वाक़िफ़ करवाए बग़ैर उर्दू की बक़ा मुश्किल है । जब तक हम नई नसल को उर्दू से वाक़िफ़ नहीं करवाईंगे उस वक़्त तक उर्दू ज़बान का मुस्तक़बिल रोशन नहीं हो सकता। उसी हक़ीक़त को महसूस करते हुए रोज़नामा सियासत ने आबिद अली ख़ां एजूकेशनल ट्रस्ट के ज़ेरे एहतेमाम उर्दू के फ़रोग़ और नई नसल को उर्दू सिखाने का काम शुरू किया था। अब तक हज़ारों लोग इस से वाबस्ता हो कर इस्तेफ़ादा कर चुके हैं।

उन्होंने इस मौके पर इदारा सियासत की अवामी ख़िदमात का भी तज़किरा किया। मुबाहिसा में लक्ष्मी देवी राज मीर अय्यूब अली ख़ां मुजतबा हुसैन ने भी हिस्सा लिया।

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