चुनाव के मायने ही है खोखले वायदों की बरसात!

चुनाव के मायने ही है खोखले वायदों की बरसात!

भारत में सन 1952 से आज तक अनेक संसदीय चुनाव हुए हैं। कांग्रेस ने ‘गरीबी हटाओ’ के नारे के साथ बहुत दिनों तक राज किया। भाजपा भी अच्छे दिन का वादा कर के सत्ता में आयी इसका नतीजा क्या हुआ आप अपने कड़वे अनुभव से अच्छे तरह जानते हैं।

आप रोजाना असहय दुख-कष्टों को झेल रहे है। ये तमाम पार्टियां दावा करती है कि उनके शासन में देश की काफी तरक्की हुई है। मगर देश की तस्वीर क्या कहती है? हालाँकि आप अपने अनुभव से देश की इस वास्तुनिष्ट इश्तिथी से परिचित हैं। मैं आपके समक्ष कुछ तथ्य और आंकड़े पढ़कर सुनाऊंगा।

ये तथ्य और आंकड़े हमने मुहैया नही कराये हैं। ये तथ्य और आंकड़े विभिन्न सरकारी और प्रमादीक गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा उपलब्ध कराये गये हैं। दुनिया में भुखमरी के शिकार 119 देशों में भारत 100 वे नंबर पर था। अब वह फिसलकर 103 नंबर पर चला गया है। यही है तरक्की!

भारत में रोजाना 20 करोड़ 30 लाख लोग भूखे सोते हैं। भारत में पूरी दुनिया के एक तिहाई गरीबो का निवास है यह तादाद बढ़ रही है। अब तक लगभग 3 लाख 50 हज़ार किसानों ने खुदकुशी की है। रोज़ाना 10 हज़ार लोग बिना इलाज के मरते हैं। रोजाना 3 हजार बच्चे कुपोषण से मरते हैं।

कुछ दिनों पहले पूर्व राष्ट्रपाति ने स्वयं कहा था कि इस देश में करीब 61 करोड़ बेरोज़गार हैं। आज उनकी तादाद क्या होगी, आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं। कुछ ही दिनों पहले रेलवे में 90 हजार पदों के लिए भर्ती का विज्ञापन निकला था। इसके लिए 2 करोड़ 80 लाख बेरोज़गार युवाओ ने आवेदन भरा था।

उत्तर प्रदेश में 362 चपरासी के पदों के लिए 23 लाख आवेदन भरे गये थे, जिनमे 255 लोग पीएचडी डिग्रीधारी थे, स्नातक डिग्रीधारीयो की तादाद भी काफी थी। पश्चिम बंगाल में 5400 ग्रुप डी के पदों के लिए 18 लाख लोगों ने आवेदन भरा है।

इसमें भी पीएचडी डिग्रीधारी हैं, डॉक्टरेट हैं, इंजीनियर हैं। यह है देश की बेरोज़गारी के भीषण संकट की स्थिति। भयावह तस्वीर। यह तस्वीर घोर पीड़ादायक और चिंताजनक है।

– लेखक ज़ीशान महबूब

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