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चुनाव से पहले दंगा कराने की साज़िश है ‘कैराना’- राम पुनियानी

2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए मुज़फ्फरनगर दंगों में 80 मुसलमानों की मौत हो गयी और हज़ारों लोगों को अपना गाँव छोड़ना पडा. अब जबकि उत्तर प्रदेश में 2017 के असेंबली चुनाव होने हैं, बीजेपी एक बार फिर अपनी मशीनरी लेकर तैयार है.
बीजेपी के सांसद हुकुम सिंह ने दावा किया है कि हज़ारों हिन्दू परिवार कैराना छोड़ने को मजबूर हैं, कैराना एक ऐसी जगह है जहां मुसलमान आदाबी हिन्दुवों से अधिक है. ये दावा बिलकुल उसी समय हुआ है जबकि इलाहाबाद में बीजेपी की नेशनल एग्जीक्यूटिव मीट हो रही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपना बयान दिया और जैसा कि आजकल हो रहा है कुछ वैसा ही.. उनका बयान तरक्क़ी के मुद्दों पर था, पीछे से साम्प्रदायिक मुद्दे अमित शाह को उठाने दिए गए और तनाव बढाने की ज़िम्मेदारी अमित शाह अच्छे से जानते हैं. शाह ने सूबे की समाजवादी सरकार पे निशाना साधा और लगों से कहा कि जो सरकार कैराना से पलायन नहीं रोक रही उसको उखाड़ फेंकना होगा.
बीजेपी के नेताओं ने कैराना को कश्मीर से जोड़ दिया और बहुत आसानी से कश्मीरी पंडित फिर सुर्ख़ियों में आ गए.
हुकुम सिंह ने पिछले हफ्ते 346 लोगों की लिस्ट जारी की और दावा किया कि कैराना से हिन्दू परिवार भाग रहे हैं. नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन में इसके बाद एक शिकायत भी दर्ज हो गयी और तुरंत ही कमीशन ने सरकार को नोटिस भेज दिया.
बस एक ही दिन बाद हुकुम सिंह अपने बयान से पलट गए और कहा कि ग़लती से हिन्दू परिवार शब्द का इस्तेमाल हुआ, वो इसको बदलने को कहेंगे. उन्होंने दावा किया कि वो अपने स्टैंड पे क़ायम हैं कि ये हिन्दू मुस्लिम मुद्दा नहीं है. ये सिर्फ़ कुछ लोगों की लिस्ट है जो कैराना से किसी डर से पलायन कर रहे हैं.
दो बड़े अखबारों ने इस लिस्ट को लेकर जांच शुरू की. UP सरकार ने भी अपनी जांच शुरू कर दी. पता ये चला कि लिस्ट में कई नाम ऐसे हैं जो मर चुके हैं, कुछ ने 10 साल पहले कैराना छोड़ दिया और कुछ ऐसे भी हैं जिनका कहना है बेहतर शिक्षा और अच्छी नौकरी की तलाश में उन्होंने घर छोड़ा.
ये दावा किया गया कि मुस्लिम गैंग हिन्दुवों को डरा रहे हैं, एक गैंग का नाम जो सामने आया उसका लीडर मुखिम कला है, लेकिन मज़े की बात तो ये है कि इसपर 14 लोगों के क़त्ल का इलज़ाम है, जिनमें तीन हिन्दू हैं लेकिन 11 मुसलमान हैं. लोकल एडमिनिस्ट्रेशन ने पता लगाया कि हुकुम सिंह की लिस्ट में 66 ऐसे हैं जिन्होंने 5 साल पहले मकान छोड़ दिया है और ये सिर्फ़ 119 लोगों की जांच से ज़ाहिर हुआ है.
तो हम क्या देख रहे हैं? बीजेपी एक तरह का डिवाइड तैयार कर रही है और मुद्दा है पलायन, ये चाहती है कि इसके ज़रिये ये आग भड़काए और कश्मीरी पंडितों से इसको जोड़ दे ताकि पूरा देश उन्माद में आ जाए. सत्ताधारी दल के नेता जो खुले मूंह ही ऐसे दावे कर चुके हैं मीडिया रिपोर्ट्स को देख कर थोड़े सावधान हो रहे हैं.
दूसरी तरफ़ देखें तो मुंबई और अहमदाबाद जैसे शहरों में मुसलमानों को इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जहां मुस्लिम घेत्तोस बन गए हैं. 1992-93 दंगों के बाद ये प्रक्रिया मुंबई में शुरू हुई और मुसलमान भिन्डी बाज़ार और जोगेश्वरी जैसी जगहों पे शिफ्ट हो गए. बिल्डर्स ने मुसलमानों को फ्लैट देने से मना कर दिया, मकान बेचने से मना कर दिया. अहमदाबाद में जहांपुरा जैसे इलाक़े घेत्तोस को दर्शाते हैं. बुरी हालत से जूझते इन इलाक़ों को गाली देने के अंदाज़ में “मिनी-पाकिस्तान” भी कहा जाता है.
कैराना के पास के शहर मुज़फ्फरनगर में एक बड़े स्केल पे मुसलमानों का पलायन हुआ चूँकि लव जिहाद जैसे मुद्दे उठाये गए, बीजेपी के विधायक ने एक विडियो जारी किया जिसमें 2 लड़कों को एक भीड़ पीट रही थी और ये भीड़ मुसलमानों की लग रही थी बाद में पता चला ये भीड़ पाकिस्तान की थी और ये वहाँ के एक प्रोग्राम से ली गयी थी. इसके बाद एक महा-पंचायत हुई जिसमें बहु बेटी बचाओ का नारा चला.
इसके बाद बड़े लेवल पे दंगा हुआ जिसमें मुसलमानों के घर बर्बाद हो गए, कई गाँव “मुस्लिम-मुक्त गाँव” बन गए. बीफ़ खाने के इलज़ाम में एक पागल भीड़ ने मोहम्मद अखलाक़ की जान ले ली. 8 महीने बाद वो गोश्त जो पहले बकरे का सिद्ध हुआ था बीफ़ का हो गया. महा पंचायत फिर शुरू हो गयीं.
आजकल के दौर में कुछ टीवी चैनल और अखबार भड़काऊ प्रोपगंडा चला रहे हैं और प्रदेश में ज़हर भर रहे हैं. येले की स्टडी बताती है कि जब जब फसाद हुआ है बीजेपी जीती है. कैराना के मुद्दे पर फिर आग लगाने की तय्यारी है लेकिन देखना होगा मीडिया के अटेंशन में हुकुम सिंह और बीजेपी इस मुद्दे से पांच खींचती है या इसको आगे ले जाती है

(राम पुनयानी)

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