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चेन्नई की बाढ़ में फंसे रांची के कई लोग, लौटना हुआ मुश्किल

रांची : इलाज कराने चेन्नई गए रांची के कई लोग वहां फंस गए हैं। न ट्रेन से आने की सहूलत, न ही प्लेन की। हर तरफ सैलाब ही सैलाब । अल्लाह को याद करते हुए वहां से महफूज़ निकलने की कोई कोशिश कामयाब नहीं हो पा रही है। चेन्नई के ज़्यादा तर इलाकों में बिजली गुल है। पीने के पानी की भी किल्लत। कुछ इलाकों में 100-150 में बोतलबंद पानी बिक रहा है। मोबाइल चार्ज नहीं हो पाने की वजह से अपनों से बातचीत करने में भी परेशानी।

लालपुर वाकेय एक फ्लैट में रहने वाले प्रमोद कुमार ने अपनी परेशानी बताई। कहा कि वह अपनी नतिनी रिया कुमारी का इलाज कराने 29 नवंबर को चेन्नई के लिए निकले। दो दिसंबर को शंकर नेत्रालय में रिया का इलाज हुआ। उन्हें तीन दिसंबर को रांची की ट्रेन पकड़नी थी, लेकिन कैंसिल हाे गई। इसकी वजह से प्रमाेद कुमार अपनी बेटी और नतिनी के साथ वहां फंस गए हैं। प्रमोद कुमार के बहनोई नरेंद्र सिंह भी अपने बेटे नीरज कुमार की आंख के इलाज के लिए शंकर नेत्रालय गए हैं। नीरज का इलाज भी पूरा हो चुका है, लेकिन वालिद और बेटा सैलाब की वजह से वहीं फंसे हुए हैं।

शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से दुबारा बारिश शुरू हो गई। बारिश होते ही डर से यहां के लोगों के रोंगटे खड़े हो जा रहे हैं। क्योंकि बारिश में पानी का बाहव काफी तेज हो जाता है। खाली इलाके में दुबारा पानी जम जा रहे हैं। बस एक ही दुआ है कि किसी तरह यहां से सही सलामत रांची पहुंच जाएं।

आसपास खाने की चीजें खत्म होती जा रही हैं। जिनके पास है, वो इसे ज़्यादा दाम पर बेच रहे हैं। बड़े खुद भूखे रहकर बच्चों के लिए खाना की इंतेजाम कर रहे हैं। जुमा को एक होटल में चावल-दाल मिला, तो लोग भरपेट खाना खाया।

शहर के ज़्यादातर इलाकों में घुटने भर से ज्यादा पानी रहता है। जिधर कम पानी हो, उधर जो सख्श जाना चाहते हैं, उनसे टेंपो वाले काफी ज़्यादा किराया वसूल रहे हैं। महफूज़ जगह पर पहुंचाने के लिए लोग काफी किराया ले रहे हैं। आने और जाने का किराया 400 रुपए ले लिया गया। जबकि कुल दूरी दो किलोमीटर है।

 

 

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