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जदयू की तमाम कोशिशों के बाद भी CM बने रह सकते हैं मांझी

जब तक मांझी इस्तीफा नहीं देंगे, नहीं चुना जा सकेगा नया लीडर, मांझी इस्तीफा नहीं देंगे तब तक दूसरे लीडर की कानूनन नहीं होगी। कोई सीएम भी नहीं बन सकेगा। मरकज़ में ऐसा हो चुका है। 1969 में जाकिर हुसैन के इंतेकाल के बाद सदर इंतिख़ाब में इं

जब तक मांझी इस्तीफा नहीं देंगे, नहीं चुना जा सकेगा नया लीडर, मांझी इस्तीफा नहीं देंगे तब तक दूसरे लीडर की कानूनन नहीं होगी। कोई सीएम भी नहीं बन सकेगा। मरकज़ में ऐसा हो चुका है। 1969 में जाकिर हुसैन के इंतेकाल के बाद सदर इंतिख़ाब में इंदिरा गांधी ने पार्टी के उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी की जगह वीवी गिरी को हिमायत देकर जितवा दिया था। मौजूदा कांग्रेस सदर ने इंदिरा गांधी को पार्टी से निकाल दिया था। इसके बाद भी वे पीएम बनी रहीं।

पहले ऐसा हुआ तो लीडर ने ही बुलाई थी बैठक, खुफिया रायदेही से फैसला

ऐसे मामलों में लीडर ने ही एमएलए दल की बैठक बुलाई थी। खुफिया वोटिंग हुआ था। 1973 में केदार पांडेय की जगह अब्दुल गफूर, 1977 में सत्येंद्र सिन्हा को हराकर कर्पूरी ठाकुर, 1979 में कर्पूरी को हटाकर रामसुंदर दास और 1983 में जगन्नाथ मिश्र को हटा चंद्रशेखर सिंह वजीरे आला बने थे। 1990 में लालू प्रसाद, रघुनाथ झा और राम सुंदर दास के बीच लीडर ओहदे का तनाज़ा भी वोटिंग से सुलझाया गया था।

बैठक में चुना जा सकता है दूसरा लीडर, पर पार्टी टूटने का खतरा

बैठक तो होगी। 243 रुकनी एसेम्बली में जदयू के 111 एमएलए हैं। वहीं 75 रुकनी एसेम्बली में 42 हैं। यहां लीडर भी चुना जाएगा। अगर मांझी के हक़ में ज़्यादा एमएलए खड़े हुए तो इंतिख़ाब सभी की मंजूरी नहीं होगा। तब वोटिंग कराना होगा। चूंकि मांझी बैठक को गैर ज़रूरी कह चुके हैं। इसलिए उनके हिमायती नहीं जाएंगे। ऐसे में पार्टी टूटने का खतरा रहेगा।

मांझी एसेम्बली तहलील करने की सिफारिश करें या भाजपा का साथ लें

मुमकिन है कि मांझी एसेम्बली तहलील करने की सिफारिश कर दें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक इसके लिए कैबिनेट की बैठक में सिर्फ एक वज़ीर का शरीक होना ही काफी है। मांझी के हक़ में अगर 30 एमएलए भी हुए तो वे भाजपा (87) के हिमायत से इक्तिदार में बने रह सकते हैं।

तो गेंद गोवर्नर के पाले में

मांझी ने एसेम्बली तहलील करने की सिफारिश की तो गवर्नर फैसला करेंगे। भाजपा की तरफ से सुशील मोदी ने जो भरोसा दिलाया है उसके मुताबिक मांझी एसेम्बली इंतिख़ाब तक वजीरे आला बने रह सकते हैं। यह इसलिए भी आसान है कि गोवर्नर केसरी नाथ त्रिपाठी भाजपा की मंज़र वाले हैं और मरकज़ में भाजपा की हुकूमत है।

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