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जनरल कियानी का ब्यान मुस्बत तब्दीली

पाकिस्तानी फ़ौज के सरबराह जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने सियाचिन ग्लेशियर पर हिंदूस्तान-पाकिस्तान की अफ़्वाज की तादाद में कमी करने और इस मसला को हल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है । जनरल कियानी का कहना है कि सियाचिन ग्लेशियर पर अफ़्वाज

पाकिस्तानी फ़ौज के सरबराह जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी ने सियाचिन ग्लेशियर पर हिंदूस्तान-पाकिस्तान की अफ़्वाज की तादाद में कमी करने और इस मसला को हल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है । जनरल कियानी का कहना है कि सियाचिन ग्लेशियर पर अफ़्वाज की बरक़रारी के नतीजा में भारी अख़राजात हो रहे हैं और इस की वजह से दोनों मुल्कों की मईशत मुतास्सिर हो रही है ।

अगर सियाचिन मसला को हल कर लिया जाता है तो फिर ये ख़तीर रक़ूमात दोनों ही मुल्कों में तर कियाती उमूर पर ख़र्च की जा सकती है ।

जनरल कियानी का ये ब्यान ऐसे वक़्त में सामने आया है जबकि दोनों मुल्कों के माबेन ताल्लुक़ात में क़दरे बेहतरी पैदा हो रही है और ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने की सिम्त ख़ुद पाकिस्तान की जानिब से पेशरफ़्त की उम्मीदें पैदा हुई हैं। मुंबई में हुए दहशत गिरदाना हमलों के बाद हालाँकि दोनों मुल्कों के ताल्लुक़ात में सर्द मोहरी पैदा हो गई थी ताहम हिंदूस्तान की कोशिशों के नतीजा में ये सर्द मोहरी ख़तम हुई और बात चीत मुख़्तलिफ़ उमूर पर शुरू हुई है जिसमें पेशरफ़्त महसूस की जा सकती है ।

हालाँकि अभी ये नहीं कहा जा सकता कि ये ताल्लुक़ात पूरी तरह बेहतर हो गए हैं यह मुस्तक़बिल करीब में ये मामूल पर आ जाएंगे ताहम ये ज़रूर कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में भी एक तवील अर्सा के बाद हिंदूस्तान के साथ ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने की अहमियत को तस्लीम किया जाने लगा है । यही वजह है कि मुख़्तलिफ़ गोशों की जानिब से इस सिलसिला में ब्यानात दिए जा रहे हैं और अब ख़ुद फ़ौजी सरबराह जनरल अशफ़ाक़ परवेज़ कियानी की जानिब से भी ये ब्यान दिया गया है कि सियाचिन मसला को हल करते हुए वहां मुतय्यन अफ़्वाज में तख़फ़ीफ़ की जानी चाहीए ।

यहां अफ़्वाज की मौजूदगी पर आने वाले अख़राजात को कम करते हुए ये रक़ूमात तर कियाती उमूर पर ख़र्च की जा सकती हैं । हिंदूस्तान ने जनरल कियानी के इस ब्यान का ख़ैर मुक़द्दम करते हुए इसे एक मुसबत तब्दीली क़रार दिया है और कहा कि यक़ीनी तौर पर अगर इस मसला को हल करलिया जाता है तो ख़तीर रक़ूमात बचाई जा सकती हैं जो तर कियाती उमूर पर ख़र्च करने के काम आ सकती हैं।

मिनिस्टर आफ़ स्टेट दिफ़ा मिस्टर एम एम पल्लम राजू के इलावा दीगर सरकारी ओहदेदारों ने भी जनरल कियानी के इस ब्यान का ख़ैर मुक़द्दम करते हुए उसे मुसबत तब्दीली क़रार दिया और कहा कि पाकिस्तानी फ़ौज के रवैय्या में भी तब्दीली आ रही है ।

ये बात अहमियत की हामिल है कि सियाचिन मसला को हल करने और वहां अफ़्वाज की तादाद में कमी करने पर ख़ुद पाकिस्तानी फ़ौज के सरबराह ने ज़ोर दिया है । जनरल कियानी के इस ब्यान से अंदाज़ा होता है कि पाकिस्तान की सियोल हुकूमत को जिस तरह हिंदूस्तान से ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने की अहमियत का अंदाज़ा हुआ है इसी तरह पाकिस्तानी फ़ौज के रवैय्या और इसकी सोच में भी
तब्दीली आ रही है ।

अब तक हिंद पाक ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने की राह में अगर सब से बड़ी कोई रुकावट थी तो वो पाकिस्तानी फ़ौज का हट धर्मी वाला और मुख़ालिफ़ हिंद रवैय्या था । कई मौक़ों पर हिंदूस्तान ने पाकिस्तान के साथ ताल्लुक़ात को बेहतर पड़ोसियों जैसे ताल्लुक़ात बनाने की कोशिशें कीं । कई मर्तबा इस सिलसिला में मुसबत पहल की गई ।

बाअज़ मौक़ों पर यक़ीनी तौर पर पाकिस्तानी हुकूमत ने भी इस पहल पर मुसबत रवैय्या इख्तेयार करने की कोशिश की थी लेकिन उसे पाकिस्तानी फ़ौज की मुख़ालिफ़त का सामना रहा था ।

पाकिस्तानी फ़ौज हमेशा ही हिंदूस्तान के साथ ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने के अमल को किसी ना किसी तरह मुतास्सिर कर देती । कारगिल की जंग उस की सब से बड़ी मिसाल है । ऐसे वक़्त में जबकि हिंदूस्तान-ओ-पाकिस्तान के माबेन ताल्लुक़ात बेहतर होने की उम्मीदें मुस्तहकम होती जा रही थीं पाकिस्तानी फ़ौज ने कारगिल में दर अंदाज़ी करते हुए ताल्लुक़ात को पहले से ज़्यादा कशीदा बना दिया था । दूसरे मौक़ों पर भी फ़ौज ने किसी ना किसी तरह बात चीत के अमल को मुतास्सिर किया था ।

ये पहला मौक़ा है जब ख़ुद फ़ौज के सरबराह ने सियाचिन मसला को हल करने और वहां अफ़्वाज की तादाद में कमी करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है । इस से पाकिस्तानी फ़ौज के रवैय्या में आई मुसबत तब्दीली को महसूस किया जा सकता है । अब तक हिंदूस्तान के ताल्लुक़ से मनफ़ी रवैय्या इख्तेयार करनेवाली फ़ौज के रवैय्या में आई ये तबदीली दोनों ही मुल्कों के लिए एक अच्छी तब्दीली कही जा सकती है और अब इस तब्दीली से फ़ायदा उठाने की ज़रूरत है ।

हकूमत-ए-पाकिस्तान को खासतौर पर इस मौक़ा से फ़ायदा उठाते हुए हिंदूस्तान के साथ ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने की कोशिशों में अपनी मज़ीद संजीदगी का मुज़ाहरा करना चाहीए और उसे इक़दाम करने चाहिऐं जिस से बाहमी एतेमाद में इज़ाफ़ा हो ।

अब जबकि पाकिस्तानी फ़ौजी सरबराह ने सारी फ़ौज के रवैय्या और इस की सोच में तब्दीली का इज़हार करते हुए सियाचिन से अफ़्वाज में तख्फ़ीफ़ की वकालत की है तो पाकिस्तानी हुकूमत को अपने सयासी हौसले और अज़म का इज़हार करते हुए ताल्लुक़ात को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए इक़दामात करने चाहिऐं।

जनरल कियानी का ब्यान दोनों मुल्कों के ताल्लुक़ात को बेहतर बनाने की राह में एक अच्छी शुरूआत फ़राहम करने का पेशख़ैमा हो सकता है लेकिन इस के लिए शर्त यही है कि पाकिस्तानी हुकूमत अब फ़ौज के रवैय्या में तब्दीली के बाद सयासी हौसलों का इज़हार करते हुए कुछ हौसला मंदाना इक़दामात करे ।

जो मौक़ा जनरल कियानी के ब्यान से दस्तयाब हुआ है उसे अब गंवाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती । पहले से जो माहौल बतदरीज दोनों मुल्कों के माबेन बेहतर हो रहा था उसे अब मज़ीद जोश के साथ और मज़ीद संजीदगी और सयासी हौसले के साथ आगे बढ़ाना पाकिस्तानी सियोल हुकूमत की ज़िम्मेदारी है जो हर हाल में पूरी की जानी चाहीए ।

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