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जनरल क्यानी की धमकी

अमरीका को एशियाई मुल्कों में सब से ज़्यादा दिलचस्पी है। अफ़्ग़ानिस्तान की जंग के बाद पाकिस्तान पर सख़्त गीर मौक़िफ़ इख़तियार करके ये अंदेशा पैदा कर दिया है कि दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ आलमी जंग का साथ देने वाले मलिक को भी वो नहीं बख़्शेगा।

अमरीका को एशियाई मुल्कों में सब से ज़्यादा दिलचस्पी है। अफ़्ग़ानिस्तान की जंग के बाद पाकिस्तान पर सख़्त गीर मौक़िफ़ इख़तियार करके ये अंदेशा पैदा कर दिया है कि दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ आलमी जंग का साथ देने वाले मलिक को भी वो नहीं बख़्शेगा।

दोनों मुल्कों के दरमयान तल्ख़ ब्यानात ने अब जनरल इशफ़ाक़ परवेज़ क्यानी को ये कहने पर मजबूर करदिया है कि अमरीका हमें इराक़ या अफ़्ग़ानिस्तान ना समझे क्यों कि पाकिस्तान एक न्यूक्लियर हथियारों का हामिल मुल्क है।

जनरल क्यानी का बहैसीयत फ़ौजी सरबराह अपने मलिक के दिफ़ा में ये ब्यान किस हद तक वाजिबी है ये पाकिस्तान के जमहूरी हुकमरानों और अप्पोज़ीशन पार्टीयों के इलावा अवाम को ग़ौर करना होगा।

अमरीका के साथ कशीदगी से पाकिस्तान की सलामती को किस हद तक ख़तरा पैदा हो सकता है इस की फ़ौजी तैयारीयों से अंदाज़ा नहीं किया जा सकता।

पाकिस्तान की दाख़िली और ख़ारिजा पालिसी के बारे में अमरीका को सब कुछ इल्म है। अगर इस ने पाकिस्तान पर दबाओ डालने की ग़रज़ से अफ़्ग़ानिस्तान की सरहद पर अपनी अफ़्वाज को मुतहर्रिक करदिया है तो इस में पाकिस्तान के हुकमरानों का ही क़सूर है।

कबायली इलाक़ों में अस्करीयत पसंदों की बढ़ती तादाद और अफ़्ग़ानिस्तान में अमरीका का साथ देने के लिए उसे पाकिस्तान की सरज़मीन पर क़दम जमाने का मौक़ा देने वाली पाकिस्तानी फ़ौज अब उसे डराने या धमकाने का काम करेगी तो ये फ़ुज़ूल सी बात कहलाएगी।

ये बात पाकिस्तान का हर शहरी जानता है कि दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ आलमी जंग में अमरीका का साथ दे कर भी पाकिस्तान को अमरीका ने अपना ख़ास हलीफ़ मुल्क सिर्फ इस हद तक मुतसव्वर किया जब उसे उस की ज़रूरत थी अब जबकि अफ़्ग़ानिस्तान में इस की हालत कमज़ोर पड़ चुकी है तो वो पड़ोसीयों पर नज़रें उठा रहा ही। अमरीका का साथ देने की वजह से पाकिस्तान की जो तबाही हुई है इस का हुक्मराँ तबक़ा को अंदाज़ा हुआ है।

दहश्तगर्दी की जड़ें इस मुल्क को जकड़ चुकी हैं तो मुतवातिर ख़ूँरेज़ी, धमाकों और बदअमनी के वाक़ियात ने पाकिस्तान को अंदर अंदर ही खोखला कर दिया है।

आलमी सतह की सयासी-ओ-मआशी तबाही के असरात का पाकिस्तान को भी सामना है।

ऐसे में कोई एक और जंग की बात करता है तो ये सिवाए अहमक़ाना सोच और तबाहकुन ख़्याल के कुछ नहीं। जनरल इशफ़ाक़ परवेज़ क्यानी ने कहा कि अगर अमरीका उन के मलिक पर हमला करता है, तो अमरीका को ये मालूम होना चाहीए कि पाकिस्तान एक न्यूक्लियर ताक़त का हामिल मुल्क है उसे पाकिस्तान का इराक़ या अफ़्ग़ानिस्तान से मुवाज़ना करने की क़ीमत चुकानी पड़ेगी।

जनरल क्यानी उस वक़्त जो कुछ ख़्याल कर रहे हैं हो सकता है कि वो अपने मलिक के अवाम के हौसले को बढ़ाना चाहते हैं मगर ज़मीनी हक़ायक़ मुख़्तलिफ़ हैं।

जब से अमरीका ने पाकिस्तान में हक़्क़ानी नैटवर्क की मौजूदगी और आई ऐस आई से इस के रवाबित के इल्ज़ामात की तशहीर की है इस को अमरीका का हर ज़िम्मेदार ओहदेदार दुहरा रहा है।

पाकिस्तान की फ़ौज और आई ऐस आई मुबय्यना तौर पर हक़्क़ानी नैटवर्क की सरपरस्ती और पुश्तपनाही कर रहे हैं तो जनरल क्यानी को इस इल्ज़ाम का जायज़ा लेना ज़रूरी है।

ये इल्ज़ाम भी काबिल-ए-ग़ौर है कि बेशतर वारदातों को पाकिस्तानी फ़ौज की ईमा पर होने का इआदा किया गया है।

अमरीकी अफ़्वाज से सबकदोश होने वाले सरबराह ऐडमिर्ल माईक मोलन ने पाकिस्तान की फ़ौज और आई ऐस आई के ताल्लुक़ से जो कुछ कहा है इस की तरदीद की जा चुकी है मगर अमरीका के दीगर ओहदेदार अख़बारात, वाईट हाओज़ और स्टेट डिपार्टमैंट के लोगों ने यही बात बार बार दुहराई है कि हक़्क़ानी नैटवर्क को पाकिस्तान की फ़ौज की सरपरस्ती हासिल है।

इस तनाज़ुर में जनरल क्यानी अमरीका को धमकी देना चाहते हैं तो इस धमकी के आगे चल कर जो नताइज बरामद होंगे वो पाकिस्तान के मौजूदा हालात में भयानक साबित होंगी। ये भी कहा जाता है कि पाकिस्तान की हुकूमत का अपनी ही अफ़्वाज पर कंट्रोल नहीं होता।

इस ख़्याल के पेशे नज़र हुकूमत और फ़ौज में हम आहंगी का नुक़्ता इश्तिराक सिर्फ यही है कि सदर आज़फ़ अली ज़रदारी अमरीका की ताबेदारी में क़तई मुज़ाहम नहीं हैं तो फिर कशीदगी की बातें ग़ैर ज़रूरी हैं।

पाकिस्तान के पास जो फ़ौजी ताक़त है इस की तवज्जा हिंदूस्तान की सरहद पर लगा दी गई। अफ़्ग़ानिस्तान से मुत्तसिल सरहद पर फ़ौजी सरगर्मीयां पाकिस्तान के लिए तशवीश का मसला है।

जनरल क्यानी ये बात तस्लीम कररहे हैं कि इन का मुलक अपनी तवील मुद्दती फ़ौजी हिक्मत-ए-अमली से लापरवाही इख़तियार नहीं करसकता लेकिन वो बह यक वक़्त मग़रिब और मशरिक़ी सरहदों पर चौकसी इख़तियार करने में किस तरह कामयाब हो सकेंगी।

पड़ोसी मुलक हिंदूस्तान के साथ कशीदगी के हवाले से फ़ौज की 81 फ़ीसद फ़ोर्स को उन्हों ने हिंदूस्तान से मुत्तसिल सरहद पर ताय्युनात किया है तो वो अमरीका के इमकानी हमलों का किस तरह मुक़ाबला कर सकेंगी।

पाकिस्तान के साथ कशीदगी के बाद अमरीकी सैक्रेटरी आफ़ स्टेट हीलारी क्लिन्टन भी अफ़्ग़ानिस्तान पहूंच गई है और वो पाकिस्तान का भी दौरा कर रही हैं।

अमरीका को बहरहाल अफ़्ग़ानिस्तान या पाकिस्तान में दहश्तगर्द सरगर्मीयों को कुचलने के लिए 10 साल से जारी जंग को हतमी शक्ल देना है तो वो कुछ भी कर सकता है।

मगर ख़तरनाक क़दम उठाए जाने के अंदेशे के तहत ब्यानात दे कर हालात को मज़ीद कशीदा बनाने की कोशिश से सूरत-ए-हाल नाज़ुक हो जाएगी।

इस लिए अमरीका का साथ देने वाले पाकिस्तान के हुकमरानों को अपनी फ़ौज की पालिसी और जमहूरी तर्ज़ हुक्मरानी के दरमयान कुछ ना कुछ हक़ीक़त पसंदाना रोल अदा करने की ज़रूरत है।

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