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जनरल परवेज़ मुशरर्फ़ की हिम्मत को जनरल वी के सिंह की दाद

नई दिल्ली, ईस्लामाबाद, 02 फरवरी: (पी टी आई) पाकिस्तान के साबिक़ फ़ौजी हुक्मराँ जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को 1999 में हिंदूस्तानी इलाक़ा कारगिल में दाख़िल हो जाने पर आज हिंदूस्तानी फ़ौज के साबिक़ सरबराह जनरल वी के सिंह की भरपूर सताइश हासिल हुई जि

नई दिल्ली, ईस्लामाबाद, 02 फरवरी: (पी टी आई) पाकिस्तान के साबिक़ फ़ौजी हुक्मराँ जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को 1999 में हिंदूस्तानी इलाक़ा कारगिल में दाख़िल हो जाने पर आज हिंदूस्तानी फ़ौज के साबिक़ सरबराह जनरल वी के सिंह की भरपूर सताइश हासिल हुई जिन्होंने कहा कि इससे एक फ़ौजी कमांडर की हिम्मत का इज़हार होता है।

जनरल वी के सिंह जिन्हों ने 2010 ता 2012 हिंदूस्तानी फ़ौज की क़ियादत की थी, कहा कि हिंदूस्तान की तरफ़ से चंद गलतीयां सरज़द हुई थीं जिसके नतीजा में पाकिस्तानी फ़ौज को सरहद पार करते हुए हिंदूस्तानी इलाक़ा में दाख़िल होने का मौक़ा मिला था और इसके बाद मुशर्रफ़ बहिफ़ाज़त आए और चले भी गए।

जनरल वी के सिंह ने यहां अख़बारी नुमाइंदों से बातचीत करते हुए कहा कि जहां तक जनरल मुशर्रफ़ का ताल्लुक़ है मैं इस बात को दो अंदाज़ में बयान करना चाहता हूँ, एक बहैसीयत मिल्ट्री कमांडर में जनरल मुशर्रफ़ को (1 किलो मीटर दूर) हिंदूस्तानी इलाक़ा में दाख़िला और एक रात के लिए अपने सिपाहीयों के साथ क़ियाम पर सताइश करना चाहता हूँ।

ये एक फ़ौजी कमांडर की जुर्रत और हिम्मत ही हो सकती है कि वो ये जानते हुए भी कि इसमें ख़तरा है यहां तक पहूंचे थे। उन्होंने कहा कि दूसरी बात ये कि हमारी तरफ़ जो कुछ भी हुआ आप सब जानते हैं और तमाम हक़ायक़ आपके सामने हैं। हमने उन्हें जाने का मौक़ा कैसे दिया? हम ने उन्हें आने का मौक़ा क्यों दिया? में सिर्फ़ यही कह सकता हूँ कि हमारी भी चंद गलतीयां हैं जिन्हें दुरुस्त करने की ज़रूरत है।

जनरल वी के सिंह आज यहां पाकिस्तान के एक सीनीयर रिटायर्ड फ़ौजी ऑफीसर के इस इन्किशाफ़ पर ये तब्सिरा कर रहे थे कि जनरल मुशर्रफ़ ने 1999 में कारगिल तसादुम से 3 माह क़बल अपनी फ़ौज के साथ हिंदूस्तानी इलाक़ा में पहूंच कर एक रात क़ियाम किया था।

हिंदूस्तानी फ़ौज के साबिक़ सरबराह ने कहा कि इस इन्किशाफ़ से वाज़िह तौर पर ये तौसीक़ भी हो जाती है कि पाकिस्तान ने ही कारगिल जंग छेड़ी थी। उन्होंने कहा कि 1999 में जो कुछ भी हुआ था, हम बिशमोल हिंदूस्तानी फ़ौज ये जानते हैं कि पाकिस्तानी फ़ौज ने ही कारगिल जंग शुरू की थी।

इसमें कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा झूट बोलता रहा है और अब इसके ओहदेदार हमारे मौक़िफ़ की तौसीक़ कर रहे हैं।पाकिस्तान के साबिक़ फ़ौजी हुक्मराँ जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के एक क़रीबी मददगार ने आज ये सनसनीखेज़ इन्किशाफ़ किया है कि 1999 में कारगिल सेक्टर पर हिंदूस्तान और पाकिस्तान की अफ़्वाज में मार्का आराई के आग़ाज़ से चंद हफ़्तों क़बल जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने एक हेलीकाप्टर के ज़रीया लाईन आफ़ कंट्रोल उबूर करते हुए हिंदूस्तानी इलाक़ा में 11 किलो मीटर के फ़ासले पर दाख़िल होकर एक रात गुज़ारी थी।

कर्नल (रिटायर्ड) अशफ़ाक़ हुसैन जो पाकिस्तानी फ़ौज में ज़राए इबलाग़ शोबा के एक सीनीयर ओहदेदार थे, कहा कि परवेज़ मुशर्रफ़ 28 मार्च 1999 को लाईन आफ़ कंट्रोल उबूर करते हुए हिंदूस्तानी इलाक़ा में 11 किलो मीटर अंदर तक दाख़िल हो गए थे।

जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ जिनके साथ उस वक़्त के 80 ब्रिगेड के कमांडर ब्रीगेडियर मसऊद असलम भी मौजूद थे, इस मुक़ाम पर एक रात गुज़ारे जो ज़करीया मुस्तक़र कहलाता है जहां पाकिस्तानी फ़ौज के निगरान कर्नल अमजद शब्बीर भी मौजूद थे। अशफ़ाक़ हुसैन ने अवाख़िर 2008 में शाय शूदा अपनी किताब फ़ाश ग़लती के गवाह : कारगिल कहानी बेनकाब में पहली मर्तबा ये इन्किशाफ़ भी किया कि जनरल परवेज़ जो उस वक़्त फ़ौज के सरबराह थे, दूसरे दिन वापस आए थे।

उन्होंने कारगिल वाक़िया पर लेफ्टीनेंट जनरल (रिटायर्ड) शाहिद अज़ीज़ के दावे पर एक टेलीविज़न मुज़ाकरा में कल रात हिस्सा लेते हुए अपने इस दावे को दुहराया। उन्होंने मज़ीद कहा कि पाकिस्तानी फ़ौज ने 18 दिसंबर 1998 को लाईन आफ़ कंट्रोल के उस पार हिंदूस्तानी सरहद में पहली मर्तबा दरअंदाज़ी की थी जहां कैप्टन नदीम और कैप्टन अली के इलावा हौलदार लईक जान को एक जासूसी मिशन पर रवाना किया गया था।

जनरल मुशर्रफ़ इन तमाम सरगर्मीयों से पूरी तरह बाख़बर थे और हिंदूस्तानी इलाक़ों में उनकी दरअंदाज़ी और शब गुज़ारी के एक माह बाद अवाइल मई में कारगिल के मसला पर हिंदूस्तान और पाकिस्तान की अफ़्वाज के दरमियान ज़बरदस्त झड़पें हुई थीं।

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