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जनरल सेल्स टैक्स क़ानूनसाज़ी के नमूने को 15सितंम्बर को क़तईयत

नई दिल्ली: रियासती वुज़रा फाइनेंस की बाइख़तियार कमेटी का एक इजलास मंगल के दिन मुनाक़िद होगा ताकि क़ानून साज़ियों को क़तईयत दी जा सके जिनकी मंज़ूरी रियासती मुक़न्निना इदारों से ज़रूरी है ताकि गुड्स ऐंड सरविसेस टैक्स जी एसटी ( इश्याय और ख़िदमत टैक्स ) के नफ़ाज़ को क़तईयत दी जा सके हालाँकि जीएसटी के नफ़ाज़ की मुजज़ा तारीख़ एक‌ अप्रैल 2016 से नफ़ाज़ की उम्मीदें मौहूम है क्योंकि मर्कज़ ने ख़ुसूसी इजलास तलब करने के नज़रिया को तर्क कर दिया है लेकिन बाइख़तियार कमेटी तैयारी का काम जारी रखे हुए है।

15सितंम्बर का इजलास बाइख़तियार कमेटी की जानिब से तलब किया गया है जिसमें नमूने के मुसव्वदा क़ानून पर तबादला-ए-ख़्याल किया जाएगा जिसकी जी एसटी के नफ़ाज़ के लिए सख़्त ज़रूरत है। कमेटी के सरबराह केरला के वज़ीरे फाइनेंस के ऐम मुनि हैं। दोनों क़ानून साज़ियाँ मर्कज़ का जी एसटी और रियासती जी एसटी की मंज़ूरी मुताल्लिक़ा रियासतों की मुक़न्निना की जानिब से ज़रूरी है ताकि मुल्क गीर सतह पर जी एसटी की शरह यकसाँ हूँ।

दूसरी क़ानूनसाज़ी मुत्तहदा जी एसटी की रियासतों की जानिब से मंज़ूरी भी ज़रूरी है। जी एसटी की दसतूरी तरमीमात के बाद क़ानून को पार्लीमेंट से मंज़ूर किया जाएगा। बादअज़ां मुसव्वदा क़ानून राय आम्मा के लिए पेश किया जाएगा। शोबा तिजारत और शोबा सनात की राय भी हासिल की जाएगी।

सी जी एसटी मर्कज़ी क़ानून होगा और रियासतों को इसी नमूने पर अपनी रियासतों में क़ानूनसाज़ी करनी होगी। रियासतों की जानिब से मुत्तहदा जीएसटी क़ानून की मंज़ूरी भी ज़रूरी होगी जो इश्याय-ओ-ख़िदमत की बेन रियासती मुंतकली से मुताल्लिक़ होगा। हुकूमत यकसाँ शरह जी एसटी नाफ़िज़ करने का इरादा रखती है जिसकी वजह से मर्कज़ी एक्साइज़ ख़िदमात टैक्स और दीगर मुक़ामी टैक्स एक‌ अप्रैल से ज़म कर दिए जाऐंगे।

इमकान है कि जी एसटी हिन्दुस्तान की जी डी पी का एक ता दो फ़ीसद होगा। मर्कज़ी वज़ीर फाइनेंस अरूण जेटली क़ब्लअज़ीं कह चुके हैं कि वो इस क़ानून को आइन्दा अप्रैल से नाफ़िज़ करना चाहते हैं। ऐसा मालूम होता है कि हुकूमत क़बल अज़ वक़्त पार्लीमेंट का सरमाई इजलास तलब करेगी ताकि मुल्क गीर सतह पर बिलवासता टैक्स निज़ाम जी एसटी आइन्दा अप्रैल से नाफ़िज़ किया जा सके।

इस मक़सद के हुसूल के लिए एक इंतेहाई अहम माशी इस्लाहात का इक़दाम किया जा रहा है जो हुकूमत के सरमाई इजलास को क़बल अज़ वक़्त तलब किए बग़ैर नाफ़िज़ नहीं किया जा सकता। रिवायती तौर पर सरमाई इजलास नवंबर के तीसरे हफ़्ते से मुनाक़िद किया जाता है लेकिन दस्तूरी तरमीमात की मंज़ूरी के लिए माली साल के नसफ़ अव्वल में रियासती असेम्बलीयों और काउंसिलों की जानिब से इस की मंज़ूरी ज़रूरी है।

सरमाई इजलास बेशतर रियासती असेम्बलीयों का आख़िर नवंबर और अवाइल दिसम्बर के दरमियान मुनाक़िद किया जाता है। लेकिन अगर पार्लीमेंट की जानिब से कोई अहम क़ानून उस वक़्त तक मंज़ूर हो जाएगी तो इस बात को यक़ीनी बनाने के लिए कि उसे रियासतों से मंज़ूर कर लिया जाएगा।

मर्कज़ को यक़ीन होना चाहिए। दस्तूर दफ़ा 368के बमूजब दस्तूरी तरमीमी बिल्स जिनमें से जी एसटी भी एक है कम अज़ कम पच्चास फ़ीसद रियासती असेम्बलीयों की जानिब से मंज़ूर किया जाना ज़रूरी है।

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