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जनवरी में फ़र्ज़ी एनकाउंटरस , हलाकतों के मुक़द्दमा की समाअत

नई दिल्ली 15 नवंबर (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज फ़ैसला किया कि आइन्दा साल जनवरी में 2002-ए-से 2006-ए-के दरमयान गुजरात में फ़र्ज़ी एनकाउंटरस में होने वाली हलाकतों के मुक़द्दमा की समाअत करेगी। मुबय्यना तौर पर ये हलाकतें अक़ल्लीयती फ़िर्क़ा के

नई दिल्ली 15 नवंबर (पी टी आई) सुप्रीम कोर्ट ने आज फ़ैसला किया कि आइन्दा साल जनवरी में 2002-ए-से 2006-ए-के दरमयान गुजरात में फ़र्ज़ी एनकाउंटरस में होने वाली हलाकतों के मुक़द्दमा की समाअत करेगी। मुबय्यना तौर पर ये हलाकतें अक़ल्लीयती फ़िर्क़ा के अफ़राद की थीं, जिन्हें दहश्तगर्द क़रार देकर निशाना बनाया गया था।

अदालत ने कहाकि दरख़ास्तें जो इस बारे में 2007-ए-में पेश की गई थीं, अहम मुआमलात से मुताल्लिक़ है और उन की समाअत मज़ीद ताख़ीर के बगै़र की जानी चाआई। जस्टिस आफ़ताब आलम और जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई पर मुश्तमिल सुप्रीम कोर्ट की एक बंच ने कहा कि 4 ता 5 साल से अहम मुआमलात ज़ेर-ए-इलतिवा हैं। हम नहीं चाहते कि इन में मज़ीद ताख़ीर हो।

बंच ने कहा कि वो मुआमला की समाअत आइन्दा साल जनवरी में करेगी, जिस की तारीख़ का बादअज़ां ताय्युन किया जाएगा। नामवर सहाफ़ी बी जे पी वरघीज़ ने एक दरख़ास्त मफ़ाद-ए-आम्मा पेश करते हुए मुबय्यना 21 फ़र्ज़ी एनकाउंटरस में पुलिस के हाथों गुजरात में 2003-ए-और 2006-ए-के दौरान होने वाली हलाकतों की तहक़ीक़ात की ख़ाहिश की थी।

एक और दरख़ास्त मफ़ाद-ए-आम्मा गीतकार और शायर जावेद अख़तर ने पेश करते हुए ऐस आई टी की जानिब से गुजरात के मुबय्यना फ़र्ज़ी एनकाउंटरस की तहक़ीक़ात की गुज़ारिश की है, जिस में इन का दावा हीका बेक़सूर अफ़राद खासतौर पर मुस्लिम फ़िर्क़ा के अफ़राद को चुन चुन कर हलाक किया गया था और उन्हें दहश्तगर्द क़रार दिया गया था।

दोनों मफ़ाद-ए-आम्मा की दरख़ास्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने मर्कज़ और गुजरात की हुकूमत को नोटिसें जारी करते हुए जवाबतलब किया था, जिन्हों ने हलफनामे दाख़िल करते हुए जवाब दे दिया ही। 2007ए- में पेश करदा दरख़ास्त मैं वरघीज़ ने कहा था कि रियास्ती हुकूमत के रिकार्ड के बमूजब 2003-ए-और 2006-ए-के दरमयान 21 एनकाउंटरस हुए थी, जिन में हलाक होने वालों में वो कारकुन भी शामिल थी, जो बैरून-ए-रयासत से गुजरात आए थे और जिन पर दहश्तगर्द होने का शुबा था।

ये वाज़िह नहीं होसका कि इन नौजवानों का क्या हश्र हुआ। 6 महलोकीन पुलिस की हिरासत में थी। ये नाक़ाबिल-ए-यक़ीन हीका हवालात में उन के पास हथियार थी, जिन की बिना पर पुलिस के हाथों अपने दिफ़ा केलिए उन की हलाकत ज़रूरी हो जाती।

उन्हों ने मर्कज़ और गुजरात हुकूमत की हिदायात के बारे में तहक़ीक़ात की ख़ाहिश की थी और शुबा ज़ाहिर किया था कि महलोकीन दहश्तगर्द नहीं बल्कि बेक़सूर अवाम थी। जावेद अख़तर ने अपनी दरख़ास्त मैं अख़बारी इत्तिलाआत का हवाला दिया था, जिन के बमूजब ये हलाकतें मुजरिमाना कार्यवाहीयां थीं।

अक्टूबर 2002-ए-में समीर ख़ान को हलाक करके उसे एनकाउंटर क़रार दिया गया था और हुकूमत गुजरात ने बादअज़ां ये मुआमला दबा दिया था। इन की दरख़ास्तें क़ानूनदां प्रशांत भूषण के ज़रीया पेश की गई हैं।

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