जब भगवान हमारा है तो पूजा करने का हक भी हमारा होना चाहिए!

जब भगवान हमारा है तो पूजा करने का हक भी हमारा होना चाहिए!

कनॉट प्लेस के प्राचीन हनुमान मंदिर में हर मंगलवार को श्रद्धालुओं की जय जयकार गूंजती है, लेकिन मंगलवार को मंदिर ‘एक ही नारा दो ही नाम, जय भीम जय हनुमान’ और ‘जब हनुमान हमारे हैं, मंदिर क्यों तुम्हारे हैं’ के नारे से गूंज उठा। सैकड़ों की तादाद में दलित समाज के लोग प्राचीन हनुमान मंदिर परिसर पहुंचे और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के उस बयान की निंदा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि हनुमान दलित हैं। इन लोगों ने बीजेपी और आरएसएस पर भगवान को बांटने का आरोप मढ़ा। साथ ही दलित समाज का कहना था कि जब भगवान हमारा है तो मंदिर हमारा होना चाहिए और महंत भी हमारा होना चाहिए।

यूपी के सीएम के बयान के बाद पूरे देश में इसका विरोध हो रहा है, लेकिन दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले दलित समाज के लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कनॉट प्लेस का प्राचीन हनुमान मंदिर को चुना। हनुमान मंदिर परिसर में जुटे ये लोग पहले बाहर नारेबाजी की। प्रदर्शन करनेवालों में भारी संख्या में महिलाएं भी थीं। जोरदार नारेबाजी के बाद धीरे-धीरे ये लोग मंदिर की तरफ बढ़ने लगे और फिर मंदिर में प्रवेश कर नारेबाजी शुरू की। कुछ लोग मंदिर में लगे घंटे बजा रहे थे और साथ में ‘जब भगवान हमारा है तो मंदिर भी हमारे हवाले करो’ के नारे गूंजने लगे।

एक महिला ने कहा कि हां मैं दलित हूं और मुझे मेरा हक चाहिए। क्यों बार-बार दलित समाज को राजनीति का हिस्सा बनाया जाता है, जब चुनाव आता है तो ये लोग कुछ भी करने पर उतारू हो जाते हैं। पहले समाज को जाति में बांटा और अब भगवान को जाति में बांट रहे हैं। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिस तरह बीजेपी लगातार बयानबाजी कर अपने देवताओं की जाति प्रमाणित कर रही है, उससे तो हमें उनका धन्यवाद करना चाहिए कि अब दलित समाज के लोग भी मंदिरों में पुजारी बन सकेंगे।

उनका कहना था कि सदियों से हिंदुत्व का हवाला देते हुए सभी हिंदूवादी पुजारियों ने सभी मंदिरों और मठों पर अपना हक कायम रखा है, दलित सिर्फ मंदिरों में दान ही करता रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले मनोज ने कहा कि हमारा प्रदर्शन किसी मांग को लेकर नहीं था, हम सिर्फ एक संदेश देना चाहते थे कि इस तरह जाति और भगवान को अपने हित के लिए नहीं बांटो। लेकिन, बीजेपी वालों ने हमारे हनुमान को भी जाति में बांट दिया। हम तो इसका विरोध करते हैं, लेकिन साथ में यह मांग करते हैं कि जब भगवान हमारा है तो पूजा करने का हक भी हमारा होना चाहिए।

साभार: नवभारत टाइम्स

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