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जब मुसलमानों की सहमति से ढहा दी गई उत्तर प्रदेश की यह मस्जिद

मुजफ्फरनगर। यहां कई साल पुरानी मस्जिद पर जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलवा दिया। दरअसल, पिछले 8 सालों से NH-58 में बाधा बनी एक मस्जिद को जिला प्रशासन ने आपसी सहमति के आधार पर ध्वस्त कर दिया है। इसके साथ ही हाईवे निर्माण में बड़ी बाधा दूर हो गई है, क्योंकि थाना मंसूरपुर क्षेत्र के गांव सिंघावली के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बनने वाले फ्लाईओवर को धार्मिक स्थल के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रोक दिया गया था। इस कारण यहां एक साइड का ही पुल बना पाया था। जिसकी वजह से इस स्थान पर सैकड़ों दुर्घटनाएं हुई, जिसमें करीब सैकड़ों ही लोगों की जान चली गई है।
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उप जिलाधिकारी सदर कुमार धर्मेंद्र ने कहा कि इस धार्मिक स्थल का ध्वस्तीकरण आपसी सहमति के आधार पर किया गया है। इस ट्रस्ट के संचालकों को बाकायदा इस जमीन का मुआवजा भी दिया गया है। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान ने कहा कि यह धार्मिक स्थल काफी समय से पुल के निर्माण में बाधा बना हुआ था। जिस वजह से यहां लगातार हादसा हो रहे थे। उन्होंने बताया कि यहां हुए हादसों में अब तक 85 लोगों की मौत हो चुकी है। संजीव बालियान ने यह भी कहा कि हाईवे निर्माण में जो भी धार्मिक स्थल आता है, हाईवे के विकास के लिए उसे हटा देना ही ठीक है। चाहे वह मंदिर हो या मस्जिद या फिर चर्च। उन्होंने कहा कि अब तक इस स्थान पर 85 लोगों की मौत हो चुकी है। जिसका तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती से हिसाब जरूर मांगेंगे। जिनकी सरकार में स्कूल का निर्माण नहीं हो पाया था। बहरहाल, जिस वक्त मस्जिद तोड़ा जा रहा था, उस समय वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात की गई थी। कयास लगाया जा रहा था कि मस्जिद तोड़ने के दौरान कुछ माहौल बिगड़ सकता है, लेकिन जिला प्रशासन ने शांति पूर्वक इस कार्य को संपन्न करवाया।
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